
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह की मुलाकात ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। शुक्रवार को लखनऊ में हुई इस मुलाकात में आगामी विधानसभा चुनाव, गठबंधन और सीट बंटवारे समेत कई राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत हुई।
मुलाकात के बाद चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि लोकदल का लक्ष्य 2027 में अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाना है। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव ने लोकदल का सम्मान बनाए रखने और पार्टी के हितों का ध्यान रखने का भरोसा दिया है। लोकदल की ओर से गठबंधन में करीब 35 विधानसभा सीटों की तैयारी और मांग की बात भी सामने आई है। हालांकि, किन सीटों पर अंतिम सहमति बनेगी, इसे लेकर बातचीत अभी जारी है।
इस मुलाकात का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि लोकदल खुद को चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत से जोड़ता है। पश्चिमी यूपी की राजनीति में किसान और जाट समुदाय लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में लोकदल का सपा के साथ आना क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इसका सीधा असर किसी दूसरे दल के जनाधार पर पड़ेगा।
दूसरी ओर, जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल यानी RLD बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ है। ऐसे में सपा और लोकदल की नजदीकी को पश्चिमी यूपी की किसान राजनीति और चौधरी चरण सिंह की विरासत से जुड़े राजनीतिक स्पेस के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने RLD और जयंत चौधरी की राजनीति पर पहले भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं।
सुनील सिंह ने कहा कि किसान, गरीब, युवा, रोजगार, महंगाई और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे चुनावी राजनीति के केंद्र में होने चाहिए। उन्होंने सपा, कांग्रेस और लोकदल को विपक्षी गठजोड़ का हिस्सा बताते हुए मिलकर चुनाव लड़ने की बात कही।
फिलहाल 35 सीटों की मांग पर बातचीत जारी है और सीटों का अंतिम बंटवारा तय नहीं हुआ है। ऐसे में 2027 से पहले पश्चिमी यूपी में गठबंधन, किसान राजनीति, जाट वोट और चौधरी चरण सिंह की विरासत को लेकर नए राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।







