
नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यूपीआई पेमेंट पर संभावित चार्ज को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। खरगे ने आरोप लगाया कि महंगाई से परेशान आम आदमी की जेब पहले ही खाली है और अब सरकार डिजिटल पेमेंट के जरिए जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी कर रही है। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ‘मोदी सरकार की लूट अब यूपीआई तक पहुंच गई है।’
खरगे ने कहा कि पहले जहां यूपीआई लेनदेन पर किसी तरह के शुल्क की बात नहीं थी, वहीं अब 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन को नो-फीस की सीमा में रखने की चर्चा सामने आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इससे अधिक राशि के डिजिटल लेनदेन पर शुल्क लगाया जाता है तो इसका सीधा असर आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा।
नोटबंदी का भी उठाया मुद्दा
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में नोटबंदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करीब 10 साल पहले नोटबंदी लागू करते समय सरकार ने डिजिटल भुगतान और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने को इसके प्रमुख उद्देश्यों में बताया था। खरगे ने सवाल किया कि जब देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया गया, तो अब उसी व्यवस्था पर शुल्क लगाने की चर्चा क्यों हो रही है।
खरगे ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आम आदमी पहले से ही बढ़ती कीमतों से परेशान है। उन्होंने दावा किया कि थोक महंगाई भी ऊंचे स्तर पर है। ऐसे समय में सरकार को जनता को राहत देने के कदम उठाने चाहिए, न कि उसकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने के नए रास्ते तलाशने चाहिए।
MDR को लेकर भी सरकार से सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर भी केंद्र सरकार से सवाल पूछा। उन्होंने कुछ मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि 5,000 रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10,000 रुपये के लेनदेन पर 50 रुपये तक की संभावित वसूली की बात सामने आई है। हालांकि, उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि क्या वास्तव में इस तरह के शुल्क की कोई योजना है।
खरगे ने कहा कि यदि कारोबारियों पर डिजिटल भुगतान का अतिरिक्त शुल्क डाला जाता है तो उसका असर अंततः ग्राहकों पर पड़ सकता है। कारोबारियों के लिए बढ़ी लागत वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल हो सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार से यूपीआई और MDR को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की और कहा कि महंगाई से जूझ रही जनता पर किसी भी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।









