
उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग की नीति लागू करने पर मुख्य सचिव ने की उच्चस्तरीय समीक्षा
लखनऊ, 22 जुलाई। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उपचारित (ट्रीटेड) जल के सुरक्षित पुनः उपयोग (सेफ री-यूज) की नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा उपचारित जल के पुनः उपयोग की व्यापक कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपनी संबंधित नीतियों और योजनाओं में उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग के प्रावधान शामिल करें तथा विभागवार री-यूज प्लान तैयार करें। उन्होंने सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और संभावित उपयोग केंद्रों की जीआईएस आधारित मैपिंग कराने के निर्देश भी दिए।
राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय समितियां गठित होंगी
बैठक में राज्य, जिला और तकनीकी स्तर पर विभिन्न समितियों के गठन का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही एसटीपी संचालकों और उपचारित जल का उपयोग करने वाली संस्थाओं के बीच सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA) तैयार करने की भी सिफारिश की गई।
मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि रेलवे, सड़क परिवहन, कृषि, ऊर्जा, नागरिक उड्डयन और शहरी विकास जैसे विभागों को भी उपचारित जल के द्वितीयक उपयोग को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।
गुणवत्ता और आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि उपचारित जल की गुणवत्ता और पर्याप्त मात्रा सभी उपयोगकर्ताओं तक सुनिश्चित की जाए। इसके लिए नियमित निगरानी, रिपोर्टिंग और विभागीय समन्वय को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए।
नोएडा, मथुरा, गाजियाबाद और लखनऊ के मॉडल प्रस्तुत
बैठक में पनकी ताप विद्युत केंद्र, मथुरा आईओसीएल रिफाइनरी तथा गाजियाबाद की औद्योगिक इकाइयों में उपचारित जल के सफल उपयोग के उदाहरण प्रस्तुत किए गए।
नोएडा में उपलब्ध 260 एमएलडी उपचारित जल में से 120 एमएलडी का उपयोग किया जा रहा है, जबकि शेष 140 एमएलडी जल हिंडन नदी में प्रवाहित हो रहा है। बताया गया कि दादरी ताप विद्युत केंद्र में अतिरिक्त 80 एमएलडी उपचारित जल का उपयोग किया जा सकता है, जिससे नोएडा को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क और रेलवे परियोजनाओं में होगा उपयोग
बैठक में बताया गया कि लखनऊ के प्रस्तावित पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क के लिए दौलतगंज एसटीपी से 22.5 एमएलडी उपचारित जल उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य चल रहा है। इसी प्रकार वाराणसी के पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क के लिए रमना एसटीपी से उपचारित जल उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
इसके अलावा प्रयागराज के राजापुर एसटीपी तथा कोड़रा एसटीपी से रेलवे स्टेशनों के लिए गैर-पेयजल के रूप में उपचारित जल उपलब्ध कराने के प्रस्ताव राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को भेजे गए हैं।
गंगा पल्स पोर्टल से होगी रियल टाइम निगरानी
एनएमसीजी के अधिकारियों ने बताया कि गंगा पल्स पोर्टल के माध्यम से एसटीपी की कार्यप्रणाली और उपचारित जल की गुणवत्ता की हर 10 मिनट में निगरानी की जा रही है। इससे वास्तविक समय में जल गुणवत्ता की समीक्षा कर आवश्यक निर्णय लिए जा सकेंगे।
बैठक में नगर विकास, सिंचाई, उद्योग, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, पंचायती राज, जल निगम, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नमामि गंगे, वन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।








