
योगी सरकार की नई पहल: तकनीकी युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर
बाट-माप उपकरण मरम्मत लाइसेंस के लिए ऑनलाइन मॉड्यूल लॉन्च, कार्यशाला स्थापना पर ₹50 हजार तक की प्रतिपूर्ति
लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार ने तकनीकी डिप्लोमा एवं डिग्रीधारी युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘बाट-माप उपकरणों के मरम्मत कार्य हेतु लाइसेंस आवेदन के लिए तकनीकी डिप्लोमा/डिग्री धारक युवाओं को प्रोत्साहित करने की नीति-2026′ के ऑनलाइन मॉड्यूल का शुभारंभ किया। इसका शुभारंभ प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले मंत्री आशीष पटेल ने किया।
मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार तकनीकी शिक्षा को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार चाहती है कि पॉलीटेक्निक, आईटीआई और अन्य तकनीकी संस्थानों से प्रशिक्षित युवा नौकरी के साथ-साथ स्वयं का व्यवसाय भी स्थापित करें।
नीति की प्रमुख विशेषताएं
- तकनीकी डिप्लोमा एवं डिग्रीधारी युवाओं को बाट-माप उपकरणों की मरम्मत का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
- कार्यशाला स्थापित करने हेतु उपकरण, टूल्स और अन्य सामग्री की खरीद पर ₹50,000 तक की प्रतिपूर्ति दी जाएगी।
- पात्र अभ्यर्थी निवेश मित्र पोर्टल तथा लीगल मेट्रोलॉजी विभाग के पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
- ऑनलाइन आवेदन, सत्यापन और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है।
कौन होंगे पात्र?
इस योजना के तहत निम्नलिखित तकनीकी योग्यता रखने वाले युवा आवेदन कर सकेंगे—
- आईटीआई (इलेक्ट्रॉनिक्स)
- इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा
- इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक (डिग्री)
- भौतिक विज्ञान (Physics) में बीएससी
आवेदक की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होना आवश्यक है तथा उसे निर्धारित अन्य पात्रता शर्तों को भी पूरा करना होगा।
स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा
लाइसेंस प्राप्त करने के बाद युवा अपनी स्वयं की कार्यशाला स्थापित कर बाट-माप उपकरणों की मरम्मत का कार्य शुरू कर सकेंगे। कार्यशाला के लिए आवश्यक मास्टर सेट, लोड सेट एवं अन्य उपकरणों की खरीद पर नीति के अनुसार प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाएगी।
मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि ऑनलाइन मॉड्यूल लागू होने से आवेदन प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और डिजिटल होगी, जिससे युवाओं को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी और तकनीकी कौशल के आधार पर स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।









