
दिव्यांगजनों के समावेशी विकास पर राज्य सलाहकार बोर्ड की 8वीं बैठक संपन्न
मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने विभागों को दिए प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण (स्वतंत्र प्रभार) राज्यमंत्री नरेन्द्र कश्यप की अध्यक्षता में दिव्यांगता पर गठित राज्य सलाहकार बोर्ड की आठवीं बैठक योजना भवन के ‘वैचारिकी’ सभागार में आयोजित हुई। बैठक में दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा, समावेशी विकास और विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े एजेंडों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक का शुभारंभ प्रमुख सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग राजेश कुमार सिंह ने मंत्री का स्वागत कर किया। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार मंडल एवं जिला स्तर पर विशेष शिविर आयोजित कर पात्र दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ उपलब्ध कराया जाए तथा जिला दिव्यांगजन अधिकारी सक्रिय भूमिका निभाएं।

बैठक के प्रमुख निर्णय एवं घोषणाएं
– विकास प्राधिकरणों, यूपीडा एवं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों द्वारा दुकानों के आवंटन में दिव्यांगजनों के लिए 3 प्रतिशत के स्थान पर 5 प्रतिशत आरक्षण लागू करने पर बल।
– दिव्यांग भरण-पोषण पेंशन ₹1,000 प्रतिमाह की जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 10,44,022 पात्र दिव्यांगजन लाभान्वित हुए।
– कुष्ठावस्था पेंशन ₹3,000 प्रतिमाह की दर से दी जा रही है। चालू वर्ष में 13,734 लाभार्थियों को इसका लाभ मिला।
– दुकान निर्माण के लिए ₹20,000 तथा संचालन हेतु ₹10,000 की सहायता को पूर्ण अनुदान में परिवर्तित करने का निर्णय।
– कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरणों की अनुदान सीमा बढ़ाकर ₹15,000 की गई। इसमें अब स्मार्टफोन, टैबलेट और डेजी प्लेयर भी शामिल हैं।
– 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले 16 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को ₹25,000 तक की सहायता।
– प्रत्येक जनपद में 15 मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित।

शिक्षा और पुनर्वास पर विशेष जोर
मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 21 विशेष विद्यालय तथा 7 समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को ब्रेल पद्धति से शिक्षा दी जा रही है तथा छात्रवृत्ति बढ़ाकर ₹4,000 प्रतिमाह कर दी गई है। इसके अलावा 3 से 7 वर्ष आयु वर्ग के दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित एवं मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए 25 बचपन डे-केयर सेंटर संचालित हैं, जिनमें 1,431 बच्चे पंजीकृत हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक दिव्यांग बच्चे को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराकर उसे आत्मनिर्भर बनाना है। साथ ही यूडीआईडी (Unique Disability ID) कार्ड बनाने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे दिव्यांगजन विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकें।
सार्वजनिक भवन होंगे दिव्यांग-अनुकूल
मंत्री ने निर्देश दिए कि सार्वजनिक भवनों का एक्सेस ऑडिट कराया जाए तथा आवश्यकतानुसार रैंप, हैंडरेल, दिव्यांग-अनुकूल शौचालय, टैक्टाइल पथ, संकेतक एवं अन्य सुगम सुविधाएं विकसित की जाएं, ताकि दिव्यांगजन बिना किसी बाधा के सरकारी सेवाओं तक पहुंच सकें।
बैठक में विधान परिषद सदस्य ध्रुव त्रिपाठी, विधायक देवेन्द्र प्रताप सिंह, रामवीर सिंह, प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, विभागीय वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि, दिव्यांगता क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।









