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राम मंदिर चढ़ावा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, CBI जांच की मांग वाली PIL दाखिल

राम मंदिर चढ़ावा विवाद
राम मंदिर चढ़ावा विवाद
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Written by
Rishabh Rai

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान और चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर कर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और पूरे मामले की समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई है।

यह याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल वित्तीय गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा है, जिन्होंने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए अपनी श्रद्धा के साथ दान दिया है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और पेशेवर जांच आवश्यक है।

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याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया गया है। साथ ही भविष्य में मंदिरों में मिलने वाले चढ़ावे और दान की राशि के प्रबंधन के लिए स्वतंत्र ऑडिट और नियामक व्यवस्था विकसित करने की मांग भी की गई है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय प्रशासनिक एसआईटी का गठन किया था। इस समिति में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। यह टीम अयोध्या में दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में इस प्रशासनिक एसआईटी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना किसी एफआईआर या आपराधिक मामला दर्ज किए जांच शुरू करना कानूनी रूप से उचित नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि सीबीआई जैसी विशेषज्ञ एजेंसी वित्तीय अपराधों की जांच में अधिक सक्षम है और उसकी जांच से जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।

अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख बेहद अहम माना जा रहा है। यदि अदालत सीबीआई जांच के आदेश देती है या केंद्र एवं राज्य सरकार से जवाब मांगती है, तो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और मामले से जुड़े अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की नजरें भी अब सर्वोच्च अदालत के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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