Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

योग और अल्जाइमर: क्या एम्स की रिसर्च बुजुर्गों के लिए उम्मीद की नई किरण है?

योग
योग
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Rishabh Rai
एम्स की रिसर्च ने खोले नए रास्ते, गट-ब्रेन एक्सिस के जरिए समझा योग का वैज्ञानिक असर

योग को सदियों से भारत की अमूल्य धरोहर माना जाता रहा है। शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का यह विज्ञान अब आधुनिक चिकित्सा अनुसंधानों का भी केंद्र बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग’ ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया भर में बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है और अल्जाइमर जैसी बीमारियां एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही हैं।

इसी बीच दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की एक हालिया रिसर्च ने उम्मीद की नई किरण जगाई है। इस अध्ययन से संकेत मिले हैं कि नियमित योग अभ्यास शुरुआती अल्जाइमर और हल्की भूलने की समस्या से जूझ रहे लोगों की मानसिक क्षमता को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है।

Advertisement Box

अल्जाइमर: बढ़ती उम्र की बड़ी चुनौती

अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम रूप है। इसकी शुरुआत अक्सर छोटी-छोटी बातें भूलने से होती है। धीरे-धीरे व्यक्ति की याददाश्त, निर्णय क्षमता, भाषा कौशल और दैनिक काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। परिवारों के लिए भी यह बीमारी भावनात्मक और आर्थिक दोनों स्तरों पर चुनौती बन जाती है।

भारत में जीवन प्रत्याशा बढ़ने के साथ ऐसे मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में बुजुर्गों की देखभाल स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगी।

एम्स की रिसर्च में क्या हुआ?

एम्स दिल्ली के शरीर रचना विज्ञान और न्यूरोलॉजी विभाग के संयुक्त अध्ययन को जर्नल ऑफ अल्जाइमर्स डिजीज में प्रकाशित किया गया। इसमें हल्के अल्जाइमर और माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट से पीड़ित मरीजों को शामिल किया गया।

इन प्रतिभागियों ने लगातार 12 सप्ताह तक प्रतिदिन 60 मिनट योग किया। पूरा कार्यक्रम विशेषज्ञों की निगरानी में संचालित किया गया। शोध की शुरुआत और अंत में उनकी याददाश्त, मानसिक स्थिति, अवसाद के लक्षण और आंतों में मौजूद सूक्ष्म जीवों की जांच की गई।

क्या मिले नतीजे?
1. याददाश्त में सुधार

मॉन्ट्रियल कॉग्निटिव असेसमेंट के आधार पर मरीजों की संज्ञानात्मक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। ध्यान केंद्रित करने, चीजों को याद रखने और मानसिक सक्रियता में सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए।

2. अवसाद में कमी

अल्जाइमर के मरीजों में डिप्रेशन एक आम समस्या है। पीएचक्यू-9 स्केल के आधार पर अवसाद के लक्षणों में स्पष्ट कमी देखी गई। मरीजों का मनोबल बढ़ा और भावनात्मक स्थिति बेहतर हुई।

3. आंतों के स्वास्थ्य में बदलाव

शोध का सबसे दिलचस्प पहलू आंतों के माइक्रोबायोम से जुड़ा था। योग के बाद लाभकारी बैक्टीरिया की संख्या बढ़ी और सूजन बढ़ाने वाले बैक्टीरिया कम हुए। यह बदलाव मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक माना जाता है।

गट-ब्रेन एक्सिस क्या है?

कुछ दशक पहले तक माना जाता था कि आंतें केवल भोजन पचाने का काम करती हैं। लेकिन अब विज्ञान कहता है कि पेट और दिमाग के बीच गहरा संबंध होता है, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है।

आंतों में मौजूद बैक्टीरिया ऐसे रसायनों का निर्माण करते हैं, जो मस्तिष्क के कार्यों, मनोदशा और प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हैं। यदि आंतों का संतुलन बिगड़ता है, तो उसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

योग संभवतः इसी तंत्र के जरिए दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

क्या योग अल्जाइमर का इलाज है?

इस सवाल का जवाब विशेषज्ञों ने बेहद स्पष्ट शब्दों में दिया है-नहीं।

योग को अल्जाइमर का पूर्ण इलाज नहीं माना जा सकता। यह दवाओं का विकल्प भी नहीं है। हालांकि शुरुआती चरण के मरीजों में यह एक प्रभावी सपोर्टिव थेरेपी की भूमिका निभा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं, नियमित चिकित्सकीय निगरानी, संतुलित आहार और मानसिक गतिविधियों के साथ योग को जोड़कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

स्वस्थ उम्र बढ़ने का नया मंत्र

स्वस्थ उम्र बढ़ना केवल लंबी उम्र पाने का नाम नहीं है। इसका अर्थ है-

  • शारीरिक रूप से सक्रिय रहना,
  • मानसिक रूप से सजग बने रहना,
  • भावनात्मक संतुलन बनाए रखना,
  • सामाजिक रूप से जुड़े रहना।

योग इन चारों पहलुओं को एक साथ प्रभावित करता है। यही वजह है कि दुनिया भर में इसे स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
  • योग हमेशा प्रशिक्षित विशेषज्ञ की निगरानी में सीखें।
  • बुजुर्ग अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार योगासन चुनें।
  • प्राणायाम और ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  • किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
  • योग को नियमित जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, न कि केवल योग दिवस तक सीमित रखें।

एम्स की यह रिसर्च अंतिम निष्कर्ष नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से एक मजबूत संकेत है कि योग केवल पारंपरिक अभ्यास नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी लाभकारी जीवनशैली हस्तक्षेप हो सकता है। बढ़ती उम्र के साथ यदि हम शरीर और मस्तिष्क दोनों को सक्रिय रखना चाहते हैं, तो योग एक सरल, सुरक्षित और सुलभ माध्यम बन सकता है। हो सकता है कि भविष्य के बड़े शोध यह साबित कर दें कि अल्जाइमर जैसी बीमारियों के प्रबंधन में योग की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। तब तक इतना तो तय है कि स्वस्थ उम्र की ओर बढ़ने के लिए योग एक सकारात्मक शुरुआत जरूर है।

<span style=योग और अल्जाइमर: क्या एम्स की रिसर्च बुजुर्गों के लिए उम्मीद की नई किरण है?">
आज फोकस में

योग और अल्जाइमर: क्या एम्स की रिसर्च बुजुर्गों के लिए उम्मीद की नई किरण है?

जन्मदिन विशेष: भारत जोड़ने की जिद से जननायक बनने तक राहुल गांधी का सफर
आज फोकस में

जन्मदिन विशेष: भारत जोड़ने की जिद से जननायक बनने तक राहुल गांधी का सफर

वैश्विक शराब बाजार में गिरावट के संकेत, भारत बन रहा सबसे बड़ा ग्रोथ हब
आज फोकस में

वैश्विक शराब बाजार में गिरावट के संकेत, भारत बन रहा सबसे बड़ा ग्रोथ हब

पासवर्ड भूलने की समस्या से मिलेगा छुटकारा, जानिए सुरक्षित पासवर्ड बनाने के आसान उपाय
आज फोकस में

पासवर्ड भूलने की समस्या से मिलेगा छुटकारा, जानिए सुरक्षित पासवर्ड बनाने के आसान उपाय

फिर साथ लड़ेंगे ‘यूपी के लड़के’? 2027 से पहले सपा-कांग्रेस की बढ़ती नजदीकियों ने बदला सियासी गणित
आज फोकस में

फिर साथ लड़ेंगे ‘यूपी के लड़के’? 2027 से पहले सपा-कांग्रेस की बढ़ती नजदीकियों ने बदला सियासी गणित

फैटी लिवर से बचाव में कारगर हो सकती हैं ये हेल्दी ड्रिंक्स, लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी
आज फोकस में

फैटी लिवर से बचाव में कारगर हो सकती हैं ये हेल्दी ड्रिंक्स, लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी

आज का राशिफल

वोट करें

आमिर की अगली फिल्म 'सितारे जमीन पर' का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ। क्या यह फिल्म आमिर को बॉक्स ऑफिस पर सफलता दिला पाएगी?

और भी पढ़ें

WhatsApp