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श्रीलंकाई महिला सांसदों का भारत दौरा, संसदीय सहयोग और महिला नेतृत्व को मिलेगा बढ़ावा

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Bureau Report

श्रीलंकाई महिला सांसदों का भारत दौरा, संसदीय सहयोग और महिला नेतृत्व को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली। श्रीलंका की महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने भारत का अपना पहला ऐतिहासिक और आधिकारिक दौरा संपन्न किया। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग को मजबूत करना और महिला नेतृत्व के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देना रहा। कार्यक्रम का आयोजन संसदीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया।

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कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग के अनुसार 19 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सरोजा सावित्री पॉलराज ने किया। प्रतिनिधिमंडल में 15 सांसदों के साथ 4 अधिकारी भी शामिल रहे। यह यात्रा नरेंद्र मोदी और अनुरा कुमारा दिसानायका के उस साझा दृष्टिकोण के अनुरूप रही, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग और महिला नेताओं के आपसी संबंधों को सुदृढ़ करना है।

दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ओम बिरला से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने भारत के ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ की जानकारी साझा की, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है।

प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के साथ भी विस्तृत चर्चा की। बैठक में ‘मिशन शक्ति’, ‘मिशन वात्सल्य’ और ‘पोषण 2.0’ जैसी योजनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। वहीं रेखा गुप्ता ने प्रतिनिधिमंडल का औपचारिक स्वागत करते हुए ‘महिलाओं के नेतृत्व में विकास’ विषय पर संवाद किया।

इस दौरान फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन ने आर्थिक विकास और नवाचार में महिलाओं की भूमिका पर गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया। साथ ही लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान ने श्रीलंकाई सांसदों को भारतीय विधायी प्रक्रियाओं, जेंडर बजटिंग और संसदीय समिति प्रणाली की जानकारी दी।

प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का भी दौरा किया और समावेशी सेवा वितरण में डिजिटल पहचान की भूमिका को समझा। इसके अतिरिक्त सदस्यों ने प्रधानमंत्री संग्रहालय, इंडिया गेट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक तथा ताजमहल का भ्रमण भी किया।

भारतीय उच्चायोग ने कहा कि यह यात्रा संसदीय जुड़ाव को गहरा करने, विकास संबंधी अनुभवों के आदान-प्रदान और महिलाओं के नेतृत्व में समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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