
अटलजी की राजनीति में राष्ट्र सर्वोपरि, सत्ता नहीं जनसेवा थी : योगी
अटल स्मृति संध्या में मुख्यमंत्री ने कहा- तीन बार प्रधानमंत्री रहते हुए भी अटलजी ने राष्ट्रहित को रखा सर्वोच्च
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बोले- अटलजी की राजनीति से सीखें संवाद, मर्यादा और संयमित भाषा
लखनऊ। पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में रविवार को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी स्थित अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में अटल स्मृति संध्या का आयोजन किया गया। श्रद्धेय पंडित अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अटलजी के राजनीतिक जीवन, राष्ट्रनिष्ठा और जनसेवा के आदर्शों को याद किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीति सत्ता सुख प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि जनसेवा और त्याग की भावना को परिलक्षित करती है। राजनीति में व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर आदर्शों और मूल्यों को महत्व देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने हमेशा पार्टी से ऊपर राष्ट्र को रखा और अपने पूरे राजनीतिक जीवन में राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर चलते रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटलजी आज भी सभी के दिलों में बसे हैं। उनकी निष्पक्ष राजनीति, लोकतांत्रिक दृष्टिकोण और राष्ट्र प्रथम की भावना के कारण सभी राजनीतिक दलों के लोग उनका सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में तीन कार्यकाल के दौरान भी अटलजी ने सदैव राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इससे युवा पीढ़ी को अटलजी के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनके राजनीतिक आदर्शों को समझने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने अटलजी की विदेश नीति की समझ और कारगिल युद्ध के दौरान उनके दृढ़ नेतृत्व को भी याद किया।
अटलजी की राजनीति में संवाद और मर्यादा जरूरी : ब्रजेश पाठक
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में अटलजी हमारे बीच होते तो संभवतः सबसे पहले राजनीति में संवाद, मर्यादा और संयमित भाषा की आवश्यकता पर जोर देते। अटलजी मानते थे कि विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष लोकतंत्र के दो पहिए हैं। मतभेद लोकतंत्र को मजबूत करते हैं, लेकिन मनभेद लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर करते हैं। अटलजी की राजनीति यह सिखाती है कि विरोधी को पराजित करना राजनीति का अंतिम उद्देश्य नहीं है। विचारों के संघर्ष के बीच देश को आगे ले जाना ही राजनीति की वास्तविक कसौटी है।
पाठक ने कहा कि आज राजनीतिक बहस कई बार आरोप-प्रत्यारोप और कटु भाषा तक सीमित हो जाती है। ऐसे समय में अटलजी की सहज, संयमित और प्रभावशाली वाणी और भी अधिक याद आती है। उन्होंने अटलजी की कविताओं और राष्ट्रवादी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अटलजी के लिए देश, लोकतंत्र और राष्ट्रहित हमेशा सर्वोच्च रहे।
डिप्टी सीएम ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सपने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि लखनऊ भी तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।
‘अटल वाणी’ ई-पुस्तक का लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान ‘अटल वाणी’ ई-पुस्तक का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं अन्य अतिथियों ने किया। इस ई-पुस्तक में अटल बिहारी वाजपेयी के विभिन्न वक्तव्यों और विचारों को संकलित किया गया है।
अटलजी से व्यक्तिगत लगाव था : अशोक चक्रधर
कार्यक्रम में पद्मश्री एवं प्रसिद्ध व्यंग्यकार अशोक चक्रधर ने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अपने संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि अटलजी से उनकी कई बार मुलाकात हुई और उन्हें हमेशा उनका आशीर्वाद मिला। चक्रधर ने कहा कि अटलजी का उनसे व्यक्तिगत लगाव था। वे अपनी कविताएं सुनाते थे और देश की राजनीति पर भी लंबी चर्चा करते थे।
अशोक चक्रधर ने अटलजी से जुड़ी कई यादें साझा करते हुए अपनी रचनाओं का पाठ भी किया, जिससे कार्यक्रम का माहौल भावपूर्ण और साहित्यिक हो गया।
अटलजी के विचार आज भी प्रासंगिक
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का राजनीतिक जीवन भारतीय लोकतंत्र में संवाद, सहमति-असहमति, राष्ट्रहित और मर्यादित राजनीति का उदाहरण है। उनका मानना था कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्रहित सभी राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों से ऊपर होना चाहिए।
अटल स्मृति संध्या के दौरान उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए उनके विचारों, कविताओं और राष्ट्रसेवा के संकल्प को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी, दारा सिंह चौहान, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ और दयाशंकर सिंह, भाजपा अवध क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, पूर्व सांसद अशोक वाजपेयी, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्यसभा सांसद बृजलाल और अमरपाल मौर्य, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान, विधान परिषद सदस्य संतोष सिंह, मुकेश शर्मा, लालजी प्रसाद निर्मल, गोविंद नारायण शुक्ल, पवन सिंह चौहान, रामचंद्र प्रधान और उमेश द्विवेदी, विधायक नीरज बोरा, भाजपा प्रदेश कार्यालय प्रभारी भारत दीक्षित, पद्मश्री मालिनी अवस्थी, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, भाजपा लखनऊ जिलाध्यक्ष विजय मौर्य, महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष त्रयंबक त्रिपाठी, वरिष्ठ भाजपा नेता अमित टंडन, शैलेंद्र शर्मा ‘अटल’, अंजनी श्रीवास्तव, रजनीश गुप्ता, कवि विख्यात मिश्रा, मंच संचालक रमेश तूफानी सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन मौजूद रहे।








