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‘दिमागी नक्सली’ बयान पर सियासी संग्राम, चिदंबरम का PM मोदी पर पलटवार

पी चिदंबरम का बड़ा बयान
पी चिदंबरम का बड़ा बयान
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Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में दिए गए ‘दिमागी नक्सली’ बयान पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ होने पर गर्व है। चिदंबरम की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री के 15 अगस्त को लाल किले से दिए गए संबोधन के एक दिन बाद सामने आई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने करीब 75 मिनट के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में नक्सलवाद और माओवादी हिंसा का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि हथियारी नक्सली ताकतें कमजोर हो चुकी हैं, लेकिन दिमागी नक्सलियों से देश को सतर्क रहने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि माओवादी सोच रखने वाले लोगों ने लंबे समय तक सत्ता के गलियारों में अपनी जगह बनाए रखी और सरकारी समितियों में सलाहकार के तौर पर नीतियों को प्रभावित किया।

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पीएम मोदी ने कहा था कि नक्सलवाद और माओवादी हिंसा ने दशकों तक देश के बड़े हिस्से और बड़ी आबादी को प्रभावित किया। उन्होंने दावा किया कि इस हिंसा के कारण लाखों युवाओं के जीवन और उनके सपनों को नुकसान पहुंचा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस संघर्ष में 3,500 से ज्यादा पुलिसकर्मी और सुरक्षा बलों के जवान मारे गए। उन्होंने नागरिकों से ऐसे तत्वों को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की अपील की।

प्रधानमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को खोखला करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले विपक्ष और अन्य लोगों की मांगों को अलग-अलग नाम देकर खारिज करती है और बाद में उन्हीं मांगों को स्वीकार कर लेती है। जयराम रमेश ने जाति आधारित जनगणना का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जाति जनगणना की मांग को ‘अर्बन नक्सल’ सोच से जोड़कर खारिज किया गया था, लेकिन बाद में सरकार ने जाति आधारित जनगणना की घोषणा कर दी।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण की राजनीतिक शैली पर भी सवाल उठाए। जयराम रमेश ने कहा कि 12 साल बाद भी प्रधानमंत्री के राजनीतिक भाषण में कोई नई बात नहीं दिखाई दी। वहीं, पी. चिदंबरम की टिप्पणी ने इस पूरे विवाद को और तूल दे दिया है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में युवाओं पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की ट्रेनिंग देने की दिशा में काम करेगी। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के युवाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की बात भी कही गई। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

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