
ई दिल्ली। चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। सोमवार को भी इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। कांग्रेस ने शाम चार बजे पार्टी के सभी महासचिवों, राज्यों के प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों की बैठक बुलाई है। विपक्ष की ओर से मंगलवार, 6 सितंबर को चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने की भी तैयारी है।
इस बीच, मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। याचिकाओं में चुनाव आयोग की बैठकों का ब्योरा सार्वजनिक करने, पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपने पद से जुड़े कुछ कार्यों से अलग रखने की मांग की गई है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण फैसलों में एकतरफा रवैया अपनाया है।
जस्टिस उज्जल भुइयां के बयान से विपक्ष को मिला नया मुद्दा
विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां के हालिया बयान को विपक्ष ने अपने अभियान का आधार बना लिया है। हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि बड़े पैमाने पर लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित करना मनमानी होगी। उन्होंने कहा कि किसी मतदाता का नाम बिना नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए मतदाता सूची से नहीं हटाया जा सकता, हालांकि मृत्यु की स्थिति इसका अपवाद है।
जस्टिस भुइयां के इस बयान के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर अपने हमले और तेज कर दिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने संवैधानिक पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है। उन्होंने कहा कि जस्टिस भुइयां ने संवैधानिक मूल्यों और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।
जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के फैसलों ने संविधान की भावना को प्रभावित किया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा देने की मांग दोहराई। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से विपक्ष के इन आरोपों को लेकर उसका अपना पक्ष भी सामने आता रहा है और आयोग अपने फैसलों तथा प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताता रहा है।
महुआ मोइत्रा ने की जस्टिस भुइयां की तारीफ
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी जस्टिस उज्जल भुइयां के बयान का समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि किसी मौजूदा न्यायाधीश का सत्ता के सामने सच बोलना एक मिसाल कायम करता है। उन्होंने जस्टिस भुइयां की स्पष्ट टिप्पणी की सराहना की।
दिल्ली में प्रदर्शन, AAP कार्यकर्ता हिरासत में
चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। रविवार को भारतीय युवा कांग्रेस ने मशाल जुलूस निकाला और जंतर-मंतर को फिर से प्रदर्शन स्थल के तौर पर बहाल करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
इसी दौरान इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रहे आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। AAP के मुताबिक, दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज, विधायक संजीव झा और कुलदीप कुमार समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। पार्टी ने दावा किया कि उसके करीब 25 कार्यकर्ताओं और उसके छात्र संगठन से जुड़े स्वयंसेवकों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।
दूसरी ओर, भाजपा ने विपक्ष पर दिल्ली का राजनीतिक माहौल खराब करने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। योगेंद्र यादव और आइसा से जुड़े कार्यकर्ता भी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल एक दिन का सांकेतिक विरोध नहीं है, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।
मुंबई में ठाकरे भाइयों की अगुवाई में प्रदर्शन
महाराष्ट्र में भी चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध ने जोर पकड़ा है। मुंबई में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे की अगुवाई में विरोध मार्च निकाला गया। इसमें महाविकास आघाड़ी के नेताओं और बड़ी संख्या में समर्थकों ने हिस्सा लिया।
उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। वहीं राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने की मांग की। विरोध मार्च बाद में एक बड़ी रैली में बदल गया। इसमें कांग्रेस के बालासाहेब थोरात और विजय वडेट्टीवार तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे, जितेंद्र आव्हाड और अनिल देशमुख समेत कई नेता शामिल हुए।
फिलहाल चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन कई राज्यों तक फैल चुका है। मंगलवार को प्रस्तावित मार्च और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत की टिप्पणी और आगे की कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ चुनाव आयोग का रुख भी इस राजनीतिक टकराव को नई दिशा दे सकता है






