
मध्य पूर्व एक बार फिर भीषण युद्ध की चपेट में है, जहां इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ताजा घटनाक्रम में इजरायल ने ईरान के दो बड़े नेताओं को निशाना बनाते हुए उन्हें मार गिराने का दावा किया है, जिसे ईरान ने भी स्वीकार कर लिया है। मारे गए नेताओं में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारीजानी और बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल गुलामरेजा सुलैमानी शामिल हैं।
ईरान ने इन हमलों को अपनी शीर्ष नेतृत्व पर सीधा हमला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वहीं इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक थी और ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई है। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और युद्ध के और विस्तार की आशंका जताई जा रही है।
ट्रंप का NATO देशों पर हमला, अमेरिका ने दिखाया सख्त रुख
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने NATO देशों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका वर्षों से अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा पर भारी खर्च करता रहा है, लेकिन संकट के समय वे साथ नहीं खड़े हो रहे हैं।
ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि अमेरिका अब किसी पर निर्भर नहीं रहेगा और ईरान के खिलाफ कार्रवाई अकेले जारी रखेगा। उन्होंने NATO की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह एकतरफा व्यवस्था बन गई है।
उन्होंने जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की मदद की भी आवश्यकता से इनकार करते हुए संकेत दिया कि अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति के बल पर ही इस संघर्ष को निर्णायक मोड़ तक ले जाएगा।
ईरान के जवाबी हमले, इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में दहशत
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। सोमवार रात दागी गई एक मिसाइल को इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया, लेकिन तेल अवीव के पास रामत गान इलाके में एक मिसाइल गिरने से दो लोगों की मौत हो गई।
इसके अलावा ईरान ने खाड़ी देशों और समुद्री जहाजों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इसका सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है।
तेल परिवहन बाधित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, खासकर अमेरिका और एशियाई देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।
लेबनान में भी बढ़ा संघर्ष, हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायली कार्रवाई
इस युद्ध का असर अब लेबनान तक फैल चुका है। इजरायल ने ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह के खिलाफ दक्षिणी लेबनान में जमीनी अभियान तेज कर दिया है।
बेरूत के दक्षिणी इलाकों में भी हवाई हमले किए गए हैं, जिससे नागरिकों में भय का माहौल है। कई इलाकों से विस्थापन की खबरें भी सामने आई हैं।
यूएई पर हमले और एयरस्पेस बंद, खाड़ी देशों में तनाव
ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात के दुबई और फुजैराह जैसे क्षेत्रों को भी निशाना बनाया। इसके बाद यूएई को कुछ समय के लिए अपना एयरस्पेस बंद करना पड़ा।
यूएई के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है और देश अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
भारत के लिए राहत: सुरक्षित पहुंचे LPG टैंकर
इस संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय जहाजों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित पार कर लिया है।
17 मार्च को “शिवालिक” नामक जहाज मुंद्रा पोर्ट पर 46,000 मीट्रिक टन LPG लेकर पहुंचा, जबकि “नंदा देवी” जहाज वडिनार पोर्ट पर 46,500 मीट्रिक टन LPG के साथ पहुंचा।
भारत ने अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत तैनात किए थे, जिससे सुरक्षित आवाजाही संभव हो सकी। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बढ़ता मानवीय संकट और वैश्विक चिंता
इस युद्ध में अब तक 2,400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या नागरिकों की है। ईरान में ही 1,400 से अधिक लोगों की मौत और 18,000 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।
इजरायल में भी लगातार सायरन और धमाकों के बीच लोग बंकरों में शरण लेने को मजबूर हैं। कई जगहों पर क्लस्टर म्यूनिशन के इस्तेमाल की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे आग और व्यापक नुकसान हुआ है।








