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नई दिल्ली: रुपए के सामने डॉलर हुआ नतमस्तक, बीते कई सालों में नहीं दिखी ऐसी ताकत

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Bureau Report

नई दिल्ली: रुपए के सामने डॉलर हुआ नतमस्तक, बीते कई सालों में नहीं दिखी ऐसी ताकत

नई दिल्ली: एक कहावत है 100 सुनार की और एक लौहार की. इसे रुपए ने चरितार्थ कर दिया. डॉलर की वजह से रुपए में लगातार गिरावट देखने को मिल रही थी. रोज़ छोटी-छोटी गिरावट रुपए को काफ़ी नुकसान पहुंचा रही थी. लेकिन बीते एक हफ्ते में रुपये ने डॉलर के मुकाबले लौहार की एक ही चोट की और 3 साल में डॉलर को सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाने में कामयाब रहा. बाज़ार की भाषा में कहें तो रुपए ने डॉलर के मुकाबले 3 साल की सबसे बड़ी छलांग लगाई।

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दरअसल, लंबे इंतजार के बाद भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal) ने रुपये में नई जान फूंक दी है. हालांकि, शुक्रवार का कारोबारी सत्र थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रहा, इसके बाद भी ये सप्ताह भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रा के लिए ‘बूस्र्ट डोज़’ साबित हुआ है।

शुक्रवार की गिरावट बनाम हफ्ते की ऐतिहासिक बढ़त

शुक्रवार को बाजार बंद होते समय रुपया डॉलर के मुकाबले थोड़ा कमजोर होकर 90.6550 के स्तर पर टिका. दिन के कारोबार में इसमें 0.3% की गिरावट देखी गई. इसकी मुख्य वजह यह रही कि मुनाफा कमाने के चक्कर में कई व्यापारियों ने डॉलर की खरीदारी तेज कर दी और रुपये पर लगाए गए अपने दांव (Long Bets) वापस ले लिए. बाजार की भाषा में कहें तो ‘स्टॉप-लॉस’ ट्रिगर होने से गिरावट थोड़ी बढ़ गई. लेकिन, अगर हम बड़ी तस्वीर देखें, तो यह गिरावट बहुत मामूली लगती है. पूरे सप्ताह में रुपये ने डॉलर के मुकाबले 1.4% की मजबूत बढ़त हासिल की है. यह जनवरी 2023 के बाद से यानी पिछले तीन सालों में रुपये का किसी एक सप्ताह में सबसे शानदार प्रदर्शन है. इस तेजी की असली नींव मंगलवार को पड़ी थी, जब अमेरिका और भारत ने महीनों की बातचीत के बाद ट्रेड डील का ऐलान किया था।

RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया

रुपये की इस मजबूती के पीछे केवल विदेशी व्यापार समझौता ही नहीं, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का आत्मविश्वास भी है. केंद्रीय बैंक ने अपनी प्रमुख रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. अमेरिका और यूरोप के साथ हुए व्यापार समझौतों के बाद अर्थव्यवस्था पर दबाव कम हुआ है और आगे की तस्वीर सकारात्मक नजर आ रही है. आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति को ‘न्यूट्रल’ रखा है. आम आदमी के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि बैंक फिलहाल ब्याज दरें बढ़ाने के मूड में नहीं हैं, जिससे आने वाले कुछ समय तक लोन की ईएमआई स्थिर रहने की उम्मीद है. बार्कलेज के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भविष्य में आरबीआई के फैसले नए आर्थिक आंकड़ों और बदलती परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

क्या यह तेजी टिकेगी

रुपये की यह चमक कितनी टिकाऊ है, यह काफी हद तक विदेशी निवेशकों (FPIs) के रुख पर निर्भर करेगा. पिछले महीने, यानी जनवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगभग 4 बिलियन डॉलर निकाल लिए थे, जिससे चिंता बढ़ गई थी. लेकिन फरवरी में हवा का रुख बदला है. इस महीने अब तक विदेशी निवेशक करीब 1 बिलियन डॉलर के शेयर खरीद चुके हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेड डील ने बाजार से निराशा का माहौल खत्म कर दिया है, लेकिन रुपये की यह तेजी तभी बरकरार रहेगी जब विदेशी निवेश का प्रवाह लगातार बना रहे. फिलहाल वैश्विक बाजार में डॉलर इंडेक्स थोड़ा गिरकर 97.8 पर आ गया है और एशियाई बाजारों में मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है।

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