
जनवरी का महीना खत्म होने वाला है और कल से नए फरवरी महीने की शुरुआत हो रही है। इस महीने कई बड़े बदलावों (Rule Change from 1st February) के साथ लागू होंगे, जिनमें एलपीजी सिलेंडर की कीमतें, टोल टैक्स पर फास्टैग नियम, और सबसे बड़ा शॉक पान-मसाला और सिगरेट के शौकीनों के लिए शामिल है। सरकार ने 1 फरवरी 2026 से इन तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और उपकर लगाने का निर्णय लिया है, जिससे इनकी कीमतों में वृद्धि होगी।
साल की शुरुआत में ही सरकार ने GST क्षतिपूर्ति उपकर को हटाकर एक नया उत्पाद शुल्क अधिसूचित किया था। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इसके तहत देश में तंबाकू और पान-मसाला पर नए शुल्क लगाए जाएंगे, जो जीएसटी दरों के अलावा होंगे। जनवरी में वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू और गुटखा पैकिंग मशीन नियम, 2026 अधिसूचित किए थे। इन नियमों के तहत निर्माताओं की उत्पादन क्षमता का आकलन कर, उस आधार पर शुल्क वसूलने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
केंद्र सरकार का यह कदम दिसंबर 2025 में संसद द्वारा पारित दो विधेयकों के बाद आया। इन विधेयकों में पान-मसाला और तंबाकू उत्पादों पर राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने की अनुमति दी गई। इस बदलाव के बाद सिगरेट की लंबी और प्रीमियम श्रेणियों पर सबसे अधिक बढ़ोतरी होगी। सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होगा। यह शुल्क 40% जीएसटी से अलग है।
Crisil की रिपोर्ट के अनुसार, शुल्क बढ़ने से सिगरेट उद्योग की बिक्री में गिरावट देखने को मिल सकती है। कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित होंगे और संभावित रूप से कीमतों में वृद्धि का बोझ ग्राहकों पर पड़ेगा। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू सिगरेट उद्योग अगले वित्तीय वर्ष में 6-8 प्रतिशत की कमी का सामना कर सकता है। इस प्रकार फरवरी की शुरुआत से सिगरेट, गुटखा और पान-मसाला महंगे हो जाएंगे। तंबाकू उत्पादों के शौकीनों को अब अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी।









