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न्यू नोएडा का असर : ग्रेटर नोएडा और बुलंदशहर के इन गांवों में जमीन की कीमत 250% बढ़ी, भूमाफिया हुए सक्रिय

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न्यू नोएडा का असर : ग्रेटर नोएडा और बुलंदशहर के इन गांवों में जमीन की कीमत 250% बढ़ी, भूमाफिया हुए सक्रिय

न्यू नोएडा : भूमाफिया और कॉलोनाइजर करोड़पति बनने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ते हैं। अब इनकी गिद्ध दृष्टि न्यू नोएडा एरिया (New Noida) पर पड़ गई है। इस पूरे इलाके में धारा-143 (गैर कृषि क्षेत्र या आबादी) दर्ज कराने का बड़ा खेल शुरू हो गया है। न्यू नोएडा में काम शुरू होने से पहले ही भूमाफिया और कॉलोनाइजर एरिया के गांवों में जा पहुंचे हैं। न्यू नोएडा के गांवों में जमीनों के रेट आसमान छूने लगे हैं। दिल्ली, गुडगांव, मुंबई , कोलकाता, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत कई शहरों के लोग न्यू नोएडा में धड़ल्ले से जमीने खरीदने में लगे हैं।

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*दादरी के गांवों में जमीन 30 लाख रुपये बीघा*

न्यू नोएडा बनने की घोषणा से पहले इस एरिया के गांवों में 5 से लेकर 7 लाख रुपये प्रति बीघा के हिसाब से जमीन की खरीद-बेच हो रही थी। जब से न्यू नोएडा का ऐलान हुआ है, तब से जमीनों के रेट आसमान छूने लगे हैं। जीटी रोड और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे से सटे गांवों में तो जमीन के रेट आसमान पर पहुंच गए हैं। इन गांवों में प्राइवेट कंपनियां जमीन खरीद कर वेयर हाउस बना रही हैं। न्यू नोएडा के आनंदपुर गांव में पहले जमीन की कीमत 12 लाख रुपये बीघा थीं। किसान इस रेट पर आसानी से जमीन बेच रहे थे। लेकिन अब रेट 30 लाख रुपये बीघा से ऊपर तक जा पहुंचे हैं। छोलस, नंगला और लुहारली समेत कई गांवों में प्राइवेट कंपनी जमीन खरीद कर वेयर हाउस बना रही हैं।

*वेयर हाउस बनाने के लिए जमीन की मांग*

खंडेडा गांव में करीब 12 लाख रुपये बीघा की दर से जमीन मिल जाती थी, लेकिन न्यू नोएडा की घोषणा होने के बाद जमीन के रेट 22 लाख रुपये बीघा तक हो गए हैं। कलौंदा और तिल बेगमपुर समेत दादरी व सिंकद्राबाद तहसील के गांवों में न्यू नोएडा बनने की भनक लगते ही जमीन के रेट बढ़ गए हैं। वहीं, इन गांवों में बाहर के लोग जमीन खरीद कर तहसील से धारा-143 कराने में लगे हुए हैं। आनंदपुर गांव के रहने वाले अनिल तौंगड का कहना है, “न्यू नोएडा बनने के बाद जमीन के रेटों में काफी बढ़ोत्तरी हो गई है। देश के कई महानगरों से लोग जमीन की खरीद-फरोख्त करने के लिए आते हैं। ब्रोकर के जरिए जमीन खरीद-बेचने में लगे हुए हैं।” तिल बेगमपुर गांव के नसीम खान ने कहा, “हमारा गांव सिकंदराबाद बॉर्डर पर है। यूपीएसआईडीए की इंडस्ट्रियल साइट के पीछे गांव है। वेयर हाउस बनाने वाली कंपनियां जमीन खरीदने में जुटी हैं। किसानों को मुंह मांगी कीमत दी जा रही है।

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