
ग्राम पंचायतों को बनाया जाएगा विकास का मजबूत आधार, केशव मौर्य ने ‘पंच सम्मेलन’ में गिनाईं नई पहलें
125 दिन रोजगार, समय पर मजदूरी, महिला उद्यमियों को ₹20 हजार तक ऋण और पीएम गति शक्ति पोर्टल पर जोर
वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार और ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘पंच सम्मेलन’ की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने की। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड के करीब 500 ग्राम प्रधानों ने भाग लिया।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से श्रमिकों की मजदूरी सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में पहुंचेगी, जिससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।
उन्होंने बताया कि अब ग्रामीण परिवारों को 100 की बजाय 125 दिनों के वैतनिक रोजगार की गारंटी मिलेगी। रोजगार की मांग के 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा, अन्यथा पात्र व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। मजदूरी के भुगतान में देरी होने पर 0.05 प्रतिशत मुआवजा तथा पांच किलोमीटर से अधिक दूरी पर कार्य करने पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान का भी प्रावधान किया गया है।
केशव मौर्य ने कहा कि महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 20 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही गांवों की सरकारी भूमि पर महिलाओं के लिए लघु उत्पादन इकाइयों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ग्रामीण भारत के विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को 35 देशों द्वारा दिया गया सर्वोच्च नागरिक सम्मान 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है।

उप मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया और कहा कि प्रत्येक नागरिक अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले। उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की पुस्तक का विमोचन भी किया।
सम्मेलन में पीएम गति शक्ति पोर्टल के माध्यम से गांवों की सड़कें, तालाब, सार्वजनिक परिसंपत्तियां और विकास कार्यों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। साथ ही ग्राम पंचायतों को अधिक सक्षम, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेषज्ञों ने विभिन्न तकनीकी एवं प्रशासनिक विषयों पर मार्गदर्शन दिया।









