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लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश? जयराम रमेश का अमित शाह पर बड़ा हमला

जयराम रमेश FILE PHOTO
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Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना में जारी राजनीतिक उथल-पुथल और विपक्षी दलों में कथित टूट के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार और विशेष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि अमित शाह विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए सुनियोजित तरीके से राजनीतिक अभियान चला रहे हैं और इससे भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद प्रभावित हो रही है।

बुधवार (17 जून) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा कि गृह मंत्री केवल विपक्ष पर लगातार हमले ही नहीं कर रहे, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और मूल्यों की गरिमा को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अमित शाह का मौजूदा राजनीतिक रवैया उस “बेइज्जती” की भरपाई का प्रयास है, जिसका सामना उन्हें 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में करना पड़ा था, जब वे कथित तौर पर परिसीमन विधेयक को पारित कराने में सफल नहीं हो पाए थे।

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कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मजबूत जनादेश लेकर जीतने वाले कई विपक्षी नेताओं को अब सत्ता और अन्य लाभों का प्रलोभन देकर भाजपा के पक्ष में लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को दो वर्ष पहले भाजपा-विरोधी एजेंडे के तहत जनता ने चुना था, उन्हें अब राजनीतिक फायदे और विशेष सुविधाएं देकर दल बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

जयराम रमेश ने गृह मंत्री के इस कथित अभियान की तुलना म्यूचुअल फंड उद्योग से करते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया बेहद संगठित और योजनाबद्ध तरीके से चलाई जा रही है। उनके अनुसार, “जिस तरह म्यूचुअल फंड उद्योग ग्राहकों की जरूरत के अनुसार अलग-अलग योजनाएं और उत्पाद पेश करता है, उसी तरह राजनीतिक दल-बदल के लिए भी नेताओं को उनकी आवश्यकताओं के हिसाब से अलग-अलग ‘पैकेज’ दिए जा रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में नैतिकता की सभी सीमाएं पार की जा रही हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी इसी तरह की रणनीति अपनाई गई। जयराम रमेश के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री ने तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 बागी सांसदों को अलग कर उन्हें नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (एनसीपी) में शामिल कराने की साजिश रची, ताकि लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संख्या और प्रभाव बढ़ाया जा सके।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यदि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए जनप्रतिनिधियों को दबाव, प्रलोभन या राजनीतिक लाभ के जरिए अपने पक्ष में किया जाता है, तो यह देश की लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने भरोसा जताया कि विपक्ष को कमजोर करने के ऐसे प्रयास अंततः सफल नहीं होंगे और लोकतंत्र की रक्षा के लिए राजनीतिक दलों तथा जनता को मिलकर खड़ा होना होगा।

हालांकि, कांग्रेस के इन आरोपों पर भाजपा या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन विपक्ष के इन आरोपों ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में दल-बदल, लोकतांत्रिक मूल्यों और सत्ता के इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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