
लखनऊ। समाजवादी परंपरा और राजनीतिक विरासत से जुड़े यादव परिवार पर गुरुवार को दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव पंचतत्व में विलीन हो गए। राजधानी लखनऊ के बैकुंठधाम (भैंसाकुंड) में पूरे राजकीय सम्मान और पारिवारिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। महज 38 वर्ष की उम्र में प्रतीक के आकस्मिक निधन ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे राजनीतिक और सामाजिक जगत को गहरे शोक में डुबो दिया।
गुरुवार सुबह जब उनकी अंतिम यात्रा आवास से निकली, तो हर आंख नम थी। समाजवादी पार्टी कार्यालय में अंतिम दर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं, नेताओं और समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा। “प्रतीक यादव अमर रहें” के नारों के बीच माहौल बेहद भावुक हो गया। अंतिम यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, लोगों की भीड़ बढ़ती चली गई और हर चेहरा एक ही सवाल पूछता नजर आया-इतनी कम उम्र में आखिर क्यों?
शोक की इस घड़ी में पूरा यादव परिवार एकजुट दिखाई दिया। बड़े भाई और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार परिवार को संभालते नजर आए। चाचा शिवपाल सिंह यादव, सांसद धर्मेंद्र यादव समेत परिवार के सभी सदस्य मौजूद रहे। प्रतीक की पत्नी और भाजपा नेता अपर्णा यादव अपनी दोनों बेटियों के साथ बेहद भावुक दिखाई दीं। उनकी आंखों से बहते आंसू इस असहनीय पीड़ा की गवाही दे रहे थे। परिवार की बहू डिंपल यादव उन्हें ढांढस बंधाती नजर आईं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, प्रतीक यादव की मौत ‘पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म’ यानी फेफड़ों की धमनियों में खून का थक्का जमने से हुई। फिटनेस और अनुशासित जीवनशैली के लिए पहचाने जाने वाले प्रतीक का इस तरह अचानक चले जाना हर किसी को स्तब्ध कर गया।





