
भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने आखिरकार एशियन गेम्स में अपना पदक का इंतजार खत्म कर दिया। मीराबाई ने बुधवार को महिलाओं के 49 किग्रा भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। यह एशियन गेम्स में उनका पहला पदक है। उन्होंने कुल 198 किग्रा वजन उठाया। उत्तर कोरिया की री सोंग-गुम ने 215 किग्रा के कुल वजन के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। री सोंग-गुम का एशियन गेम्स में यह लगातार तीसरा स्वर्ण पदक है।
मीराबाई ने प्रतियोगिता के स्नैच राउंड में तीनों प्रयास सफलतापूर्वक पूरे किए। उन्होंने पहले 83 किग्रा, फिर 85 किग्रा और तीसरे प्रयास में 87 किग्रा वजन उठाया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 107 किग्रा और 111 किग्रा का सफल प्रयास किया। उनका सर्वश्रेष्ठ कुल स्कोर 198 किग्रा रहा।
एशियन गेम्स के पोडियम पर पहली बार पहुंचीं
मीराबाई चानू के लिए यह पदक इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले तीन एशियन गेम्स में उनका पोडियम तक पहुंचने का सपना पूरा नहीं हो सका था। 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में उन्होंने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में हिस्सा लिया था और नौवें स्थान पर रही थीं। इसके बाद 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में चोट के कारण वह हिस्सा नहीं ले सकीं।
2022 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में मीराबाई ने वापसी की। उस समय महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में उन्होंने कुल 191 किग्रा वजन उठाया और चौथे स्थान पर रहीं। पदक से मामूली अंतर से चूकने के बाद मीराबाई ने एशियन गेम्स में पदक जीतने के लक्ष्य को लगातार अपने सामने रखा। 2026 में आखिरकार उनका यह इंतजार खत्म हुआ।

28 साल बाद भारत को वेटलिफ्टिंग में सिल्वर
मीराबाई की उपलब्धि भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। एशियन गेम्स में भारत का आखिरी वेटलिफ्टिंग पदक 1998 के बैंकॉक गेम्स में आया था, जब कर्णम मल्लेश्वरी ने सिल्वर मेडल जीता था। इसके बाद लंबे अंतराल के बाद भारत को इस खेल में फिर सिल्वर मिला।
इस पदक के साथ मीराबाई ने भारतीय वेटलिफ्टिंग की एशियन गेम्स में चली आ रही पदक-विहीन अवधि को भी समाप्त किया। हालांकि एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग का भारत का पहला गोल्ड अब भी इंतजार में है। प्रतियोगिता शुरू होने से पहले उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भारत ने इस खेल में कुल 14 पदक जीते थे, जिनमें पांच सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज शामिल थे।
री सोंग-गुम के सामने कड़ी चुनौती
मीराबाई के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तर कोरिया की री सोंग-गुम थीं। री पहले ही इस प्रतियोगिता में लगातार दो स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं और इस बार भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 215 किग्रा का कुल वजन उठाया। मीराबाई ने 198 किग्रा के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।
मीराबाई और री के बीच का अंतर प्रतियोगिता में साफ दिखाई दिया, लेकिन भारतीय स्टार ने अपने प्रदर्शन से सिल्वर पदक पक्का किया। एशियन गेम्स से पहले भी री को इस वर्ग की प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा था।
ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप के बाद एशियाई पदक भी
मीराबाई चानू के करियर में एशियन गेम्स का पदक लंबे समय से एक कमी के रूप में देखा जाता रहा था। वह टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। इसके अलावा कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका शानदार रिकॉर्ड रहा है और 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने लगातार तीसरा गोल्ड मेडल जीता था।
2025 विश्व चैंपियनशिप में भी मीराबाई ने सिल्वर मेडल जीता था। ऐसे में एशियन गेम्स का पदक उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गया है।
भारत की पदक तालिका में एक और इजाफा
एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए शूटिंग समेत कई खेलों में पदक आए हैं। मीराबाई का सिल्वर भारतीय दल के लिए एक और महत्वपूर्ण पदक है। इससे पहले शूटिंग में हिमांशु ढिल्लों, एलावेनिल वालारिवान और भारतीय टीमों ने पदक जीते हैं।
मीराबाई की इस उपलब्धि की खासियत यह भी है कि उन्होंने ऐसे समय में पदक हासिल किया जब एशियाई वेटलिफ्टिंग में मुकाबला बेहद कड़ा है। एशियन गेम्स में पहली बार पोडियम पर पहुंचकर उन्होंने अपने करियर का वह पदक हासिल कर लिया, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था।
मीराबाई चानू का एशियन गेम्स सफर
- 2014 इंचियोन: महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में नौवां स्थान
- 2018 जकार्ता: चोट के कारण हिस्सा नहीं लिया
- 2022 हांगझोऊ: 49 किग्रा वर्ग में 191 किग्रा कुल वजन, चौथा स्थान
- 2026 आइची-नागोया: 49 किग्रा वर्ग में 198 किग्रा कुल वजन के साथ सिल्वर मेडल
एशियन गेम्स में मीराबाई का यह सिल्वर भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए लंबे इंतजार के बाद आया पदक है। ओलंपिक और विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी मीराबाई ने अब एशियाई खेलों के पोडियम पर भी अपना नाम दर्ज करा दिया है।





