
नई दिल्ली। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI के चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए नए UPI शुल्क ढांचे को वापस लेने की मांग की। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर सरकार के फैसले को लेकर सवाल उठाए और इसे अमेरिका से जुड़े अपने राजनीतिक आरोपों से जोड़ा।
राहुल गांधी ने अपने वीडियो में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक बार इंदिरा गांधी से पूछा गया था कि उनका झुकाव लेफ्ट की तरफ है या राइट की तरफ। राहुल के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने जवाब दिया था कि उनका झुकाव किसी एक तरफ नहीं है और उनकी सोच सीधी है।
इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी का कॉन्सेप्ट अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री न तो बाईं तरफ हैं और न दाईं तरफ, बल्कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने का रास्ता चुना है। राहुल गांधी ने UPI पर प्रस्तावित शुल्क को भी इसी राजनीतिक आरोप से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से फैसला वापस लेने की अपील की।
राहुल गांधी ने अपने वीडियो में कहा कि UPI पर शुल्क लगाकर और अमेरिका को बड़ी रकम देकर सरकार ने देश के हर नागरिक पर टैक्स लगा दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अमेरिका के सामने झुकना बंद करने और UPI शुल्क वापस लेने की मांग की।
हालांकि, सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर दावों में महत्वपूर्ण अंतर है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नया MDR सरकार की ओर से लगाया गया टैक्स नहीं है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, MDR पेमेंट इकोसिस्टम के प्रतिभागियों—जैसे बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर—के बीच वितरित किया जाएगा और इसका उद्देश्य UPI व्यवस्था के संचालन तथा विस्तार को टिकाऊ बनाना है।
NPCI के नए ढांचे के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेनदेन पर सामान्यतः 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन के लिए MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है। वहीं Person-to-Person यानी P2P भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए निर्धारित जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे। वित्त मंत्रालय के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।
विपक्ष का तर्क है कि MDR भले ही सीधे ग्राहक से न लिया जाए, लेकिन व्यापारियों पर पड़ने वाली लागत का असर आगे चलकर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। कांग्रेस ने इसी आधार पर सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
इस पूरे मामले ने अब आर्थिक नीति के साथ-साथ राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। कांग्रेस इसे आम लोगों और छोटे कारोबारियों से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि MDR टैक्स नहीं है और इसका उद्देश्य UPI के डिजिटल भुगतान ढांचे को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है।









