
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, चीन के तिब्बत क्षेत्र में मौजूद करीब 400 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और अपने परिवारों के संपर्क में हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय नागरिक अब सुरक्षित दिल्ली पहुंच गए हैं। ये सभी तमिलनाडु के रहने वाले हैं। इसके अलावा, त्रिशूली वन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे 63 भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है।
MEA के मुताबिक, चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से सड़क मार्ग से नेपाल पहुंच गए हैं। उन्हें वहां से निकालने की कोशिश लगातार जारी है। इसके अलावा करीब 100 भारतीय मूल के ऐसे लोग भी हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि इनमें कुछ लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हो सकते हैं और उनके पास दूसरी नागरिकता है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में राहत और बचाव के लिए भारत लगातार मदद पहुंचा रहा है। आपदा के बाद 26 अगस्त को पहला विमान 10 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल रवाना हुआ था। इसमें अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएं शामिल थीं।
इसके बाद 27 अगस्त को दूसरा विमान 37.5 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल भेजा गया। इसमें टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, पानी निकालने वाले पंप, किचन सेट, जनरेटर, दवाएं और खाद्य सामग्री शामिल हैं।
नेपाल के अनुरोध पर भारत अब टनल रेस्क्यू टीम और मेडिकल टीम भेजने की तैयारी कर रहा है। पहले एक टीम भेजकर मौके के हालात और जरूरी उपकरणों का आकलन किया जाएगा। इसके अलावा भारत ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित इलाकों की कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए बेली ब्रिज और तकनीकी टीम भेजने का प्रस्ताव भी दिया है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय दूतावास और कंट्रोल रूम लगातार सक्रिय हैं। MEA का कंट्रोल रूम 24 घंटे काम कर रहा है, जबकि चीन में भारतीय दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। भारत का फोकस फंसे हुए भारतीयों को सुरक्षित निकालने और नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने पर है।







