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भोटेकोशी की बाढ़ का पूरा घटनाक्रम: 5200 मीटर से ग्लेशियर गिरा, मिनटों में बढ़ा नदी का जलस्तर

नेपाल हादसा
नेपाल हादसा
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Written by
Rishabh Rai

नेपाल में आई अचानक भीषण बाढ़ ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। नेपाल-चीन सीमा पर रसुवा जिले के रासुवागढ़ी और तिमुरे इलाके से शुरू हुई तबाही ने कुछ ही समय में बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। तेज बहाव के साथ आया पानी और मलबा इतना शक्तिशाली था कि रास्ते में आने वाली इमारतें, सड़कें और पुल तक बह गए। कई इलाकों में गांवों का संपर्क टूट गया। इस आपदा में अब तक 165 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 1,000 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।

राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन पहाड़ी इलाके और खराब मौसम बचाव टीमों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इस बीच इस सवाल पर भी चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतनी भीषण बाढ़ अचानक आई कैसे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इसका संबंध ग्लेशियर के टूटने और उसके साथ हुए बड़े पैमाने के बर्फ-चट्टान मलबे के खिसकने से हो सकता है।

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5200 मीटर की ऊंचाई पर टूटा ग्लेशियर

बताया जा रहा है कि लैंगटांग लिरुंग पर्वत के उत्तर मुख पर करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूट गया। इसके बाद बर्फ, चट्टान और मलबे का बड़ा हिस्सा लगभग 1,200 मीटर नीचे घाटी में जा गिरा।

ऊंचाई से नीचे गिरने के दौरान इस मलबे ने भारी तबाही की स्थिति पैदा कर दी। बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टानें लेंडे खोला नदी के रास्ते में आ गईं। इससे नदी का सामान्य प्रवाह रुक गया और वहां अस्थायी प्राकृतिक बांध जैसा बन गया।

कुछ समय बाद जब यह अवरोध टूटा तो जमा हुआ पानी और मलबा एक साथ तेजी से नीचे की ओर बह निकला। पानी के साथ चट्टानें, मिट्टी, बर्फ और अन्य मलबा भी बहता चला गया। इस पूरी प्रक्रिया ने अचानक आई बाढ़ को बेहद खतरनाक बना दिया।

लेंडे खोला से भोटेकोशी तक पहुंची बाढ़

लेंडे खोला तिब्बत क्षेत्र से निकलने वाली सहायक नदी है। यह नेपाल-चीन सीमा के करीब रसुवागढ़ी और तिमुरे इलाके में भोटेकोशी नदी में मिलती है। ग्लेशियर के टूटने के बाद मलबे और पानी का तेज बहाव इसी नदी में पहुंचा।

इसके बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। भोटेकोशी तिब्बत से नेपाल में प्रवेश करती है और रसुवा जिले से होकर आगे बढ़ती है। रासुवागढ़ी और तिमुरे के आसपास बाढ़ का असर सबसे ज्यादा दिखाई दिया।

पानी का बहाव इतना तेज था कि लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। बाढ़ ने सड़क और पुल जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचाया। कई जगहों पर रास्ते पूरी तरह बंद हो गए और प्रभावित क्षेत्रों का संपर्क दूसरे इलाकों से कट गया।

त्रिशूली नदी में भी बढ़ा खतरा

भोटेकोशी नदी आगे जाकर त्रिशूली नदी में मिलती है। यही वजह रही कि ग्लेशियर से शुरू हुआ यह पानी और मलबा सिर्फ रसुवा जिले तक सीमित नहीं रहा। इसका असर त्रिशूली नदी के प्रवाह पर भी पड़ा और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया।

जानकारी के मुताबिक, त्रिशूली नदी में कुछ स्थानों पर पानी का स्तर सिर्फ 30 मिनट में 7 से 9 मीटर तक बढ़ गया। अचानक इतने बड़े स्तर पर जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। जिन लोगों को बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा नहीं था, उनके लिए स्थिति बेहद मुश्किल हो गई।

भूकंप या ग्लेशियर? वजह पर अलग-अलग दावे

बाढ़ की वजह को लेकर नेपाल और चीन की ओर से सामने आ रही शुरुआती जानकारियों में कुछ अंतर दिखाई दे रहा है। चीन ने नेपाली क्षेत्र में आए भूकंप को ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं की संभावित शुरुआत बताया है।

नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने कहा कि शुरुआती जानकारी के अनुसार नेपाली क्षेत्र में भूकंप आया, जिसके बाद बर्फ का हिमस्खलन हुआ और फिर भूस्खलन की स्थिति बनी। उन्होंने कहा कि इसके कारण नेपाल और चीन दोनों तरफ सीमा क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ और लोग लापता हुए।

दूसरी ओर, विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन में ग्लेशियर के निचले हिस्से के टूटने और आइस-रॉक एवलांच को अहम वजह माना जा रहा है। यानी ऊंचाई से ग्लेशियर और चट्टानों का बड़ा हिस्सा नीचे गिरा, जिससे नदी का प्रवाह बाधित हुआ और बाद में अचानक बांध टूटने जैसी स्थिति में पानी और मलबा नीचे की ओर बह गया।

सैटेलाइट तस्वीरों ने भी खोली तबाही की तस्वीर

बाढ़ के बाद प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन किया गया। पहले और बाद की तस्वीरों में इलाके में हुए बड़े बदलावों को देखा गया। शुरुआती अध्ययन में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से लेंडे नदी में ग्लेशियर से जुड़ी बाढ़ आने की बात सामने आई।

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने भी इस अध्ययन से जुड़ी जानकारी साझा की। इसके मुताबिक, रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में नेपाल-चीन सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने के कारण लेंडे नदी में अचानक बाढ़ आई।

165 मौतें, 1000 से ज्यादा लापता

इस आपदा का सबसे दर्दनाक पहलू जानमाल का भारी नुकसान है। अब तक 165 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 1,000 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

राहत दल प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने में जुटे हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से दुर्गम इलाकों में पहुंचने की कोशिश की जा रही है। लेकिन मलबे से भरे रास्ते, खराब मौसम और पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियां बचाव अभियान को मुश्किल बना रही हैं।

फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराना है। वहीं, इस घटना की विस्तृत वैज्ञानिक जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ग्लेशियर टूटने की प्रक्रिया किस वजह से शुरू हुई और भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

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