
रामकथा के दौरान मदरसों की शिक्षा को लेकर दिया बयान, आतंक और जिहाद का किया जिक्र
कथावाचक एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य पक्षकार कौशल किशोर ठाकुर का एक विवादित वक्तव्य चर्चा में है। रामकथा के दौरान उन्होंने मदरसों की शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उनकी तुलना दैत्यों और असुरों के गुरुकुल से की। उनके इस बयान में आतंक और जिहाद का भी जिक्र किया गया।
कौशल किशोर ठाकुर ने अपने वक्तव्य में कहा कि पहले दैत्य और असुर अपने गुरुकुलों में आतंक और जिहाद की शिक्षा देते थे। उन्होंने आगे कहा कि आज वही शिक्षा मदरसों में दी जा रही है। उनके इस बयान में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
रामकथा के दौरान मदरसों पर टिप्पणी
रामकथा के मंच से दिए गए इस बयान में कौशल किशोर ठाकुर ने प्राचीन धार्मिक आख्यानों में वर्णित दैत्यों और असुरों के गुरुकुलों का उल्लेख करते हुए वर्तमान समय के मदरसों से उनकी तुलना की। उन्होंने अपने वक्तव्य के जरिए मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा पर सवाल उठाए।
उनके बयान में मदरसों को आतंक और जिहाद की शिक्षा से जोड़ने की बात कही गई है। हालांकि, इस वक्तव्य के आधार पर उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती है। मदरसों में शिक्षा के स्वरूप को लेकर किसी व्यापक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित तथ्यों और प्रमाणों की जांच आवश्यक है।
कौशल किशोर ठाकुर कौन हैं?
कौशल किशोर ठाकुर कथावाचक हैं और श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले में मुख्य पक्षकार के रूप में भी जाने जाते हैं। धार्मिक आयोजनों और कथाओं के दौरान उनके वक्तव्य विभिन्न विषयों पर चर्चा का विषय बन सकते हैं।









