
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर। विजयदशमी के पावन अवसर पर दिल्ली स्थित स्वामिनारायण अक्षरधाम मंदिर में भव्य ‘विश्व शांति महायज्ञ’ का आयोजन किया गया। इस दौरान देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने विश्व में शांति, सद्भाव, एकता और भाईचारे की स्थापना के लिए प्रार्थना की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित इस महायज्ञ में 108 यज्ञकुंडों में आहुतियां अर्पित की गईं।

महायज्ञ का शुभारंभ सुबह छह बजे संतों के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। देश-विदेश के विभिन्न मंदिरों से आए 30 संतों और महंतों ने विश्व शांति के लिए वैदिक प्रार्थना की। इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने यजमान के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए।

इस विशेष अवसर पर अक्षरधाम मंदिर परिसर को रंगोली और ध्वज-पताकाओं से आकर्षक ढंग से सजाया गया। पूरे परिसर में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने भगवान स्वामिनारायण के चरणों में विश्व से युद्ध, हिंसा और अशांति समाप्त होने की कामना की।
बीएपीएस (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामिनारायण संस्था) के प्रमुख गुरुहरि महंत स्वामी महाराज की प्रेरणा से शुरू हुई इस परंपरा के तहत हर वर्ष दशहरा के अवसर पर अक्षरधाम परिसर में विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जाता है।
कार्यक्रम के दौरान महंत स्वामी महाराज के शांति संदेश को भी दोहराया गया। संदेश में कामना की गई कि दुनिया में जहां कहीं भी युद्ध, हिंसा और अराजकता का माहौल है, वह जल्द समाप्त हो। सभी लोग प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत करें तथा उनके जीवन में श्रद्धा, भक्ति और निष्ठा का भाव विकसित हो।
दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसी भावना के साथ श्रद्धालुओं ने अपने जीवन से नकारात्मकता, अहंकार और घृणा को दूर कर सकारात्मकता अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विश्व में शांति, सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना रहा।









