
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं से जुड़े एक और मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। यह मामला 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर क्षेत्र में कथित तौर पर प्रवेश करने से जुड़ा है। अब क्राइम ब्रांच दोनों नेताओं के खिलाफ दर्ज दो मामलों की जांच करेगी।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाई जा चुकी है। दोनों नेताओं ने अपनी रिहाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। वे स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देना चाहते हैं, जिसमें उनकी हिरासत बढ़ाई गई थी।
जंतर-मंतर पहुंचने पर दर्ज हुए दो मामले
पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और CJP के 11 अन्य सदस्य कथित तौर पर एक निजी परिसर से होकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। बताया गया है कि जंतर-मंतर को अब निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर कर दिया गया है।
वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद सभी 14 लोगों को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने इस घटना के संबंध में दो मामले दर्ज किए। इनमें से एक मामला पहले ही क्राइम ब्रांच को सौंपा जा चुका था। अब दूसरे मामले की जांच भी अपराध शाखा करेगी।
इस कार्रवाई के बाद दोनों नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच एक ही एजेंसी करेगी। हालांकि, जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही मामले से जुड़े आरोपों और घटनाक्रम की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
21 अक्टूबर तक बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत
सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी रिहाई की मांग करते हुए अदालत जाने का फैसला किया है। दोनों नेता जंतर-मंतर में कथित अनधिकृत प्रवेश के मामले में अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती देंगे।
SEM कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके व्यवहार पर टिप्पणी की थी। अदालत का कहना था कि उनका आचरण कानून के प्रति सम्मान नहीं दिखाता और इससे प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रदर्शन करने की आदत का संकेत मिलता है।
हालांकि, हिरासत बढ़ाने का आदेश अंतिम दोषसिद्धि नहीं है। मामले में दोनों नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान फैसला होना बाकी है।
पुलिस ने जमानत पर क्यों जताई आपत्ति?
दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं की हिरासत जारी रखने के पक्ष में दलील दी थी। पुलिस का कहना था कि उन्होंने बार-बार कानून का उल्लंघन किया है। पुलिस को आशंका थी कि रिहा होने के बाद वे दोबारा ऐसा कर सकते हैं और दूसरे लोगों को भी नियम तोड़ने के लिए उकसा सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, SEM कोर्ट ने जमानत से जुड़े दस्तावेजों और जमानत देने वाले लोगों की जानकारी पर भी सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि पहचान दस्तावेजों में विसंगतियां थीं। साथ ही, जमानत देने वाले लोग उन व्यक्तियों के बारे में बुनियादी जानकारी नहीं दे पाए, जिनके लिए उन्होंने जमानत ली थी। इन कारणों से जमानत की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई गई।
आगे क्या होगा?
अब क्राइम ब्रांच दोनों मामलों की जांच करेगी। वहीं, सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई की मांग पर आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। दिल्ली हाई कोर्ट में उनकी ओर से दी जाने वाली चुनौती और संबंधित अदालतों के आदेशों से मामले की अगली दिशा तय हो सकती है।
फिलहाल, दोनों नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच जारी है। यह मामला दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों से जुड़े नियमों और उनके पालन को लेकर भी चर्चा में है। जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि दोनों नेताओं को राहत मिलती है या उनकी हिरासत और कानूनी मुश्किलें आगे भी जारी रहती हैं।









