
नई दिल्ली। अमेरिकी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपने वैश्विक कार्यबल में बड़ी कटौती करते हुए लगभग 4,800 कर्मचारियों की छंटनी का फैसला किया है। यह संख्या कंपनी के कुल कर्मचारियों का करीब 2.1 प्रतिशत है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दुनिया की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भारी निवेश कर रही हैं और परिचालन लागत को संतुलित करने की कोशिश में जुटी हैं।
माइक्रोसॉफ्ट सहित कई बड़ी टेक कंपनियां वर्ष 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। कंपनी का Azure क्लाउड कारोबार AI सेवाओं के विस्तार से लाभान्वित हो रहा है, लेकिन विशाल डेटा सेंटरों के निर्माण और अत्याधुनिक कंप्यूटिंग संसाधनों पर बढ़ते खर्च ने कंपनी के वित्तीय दबाव को बढ़ा दिया है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि AI आधारित ऑटोमेशन के कारण कई पारंपरिक सॉफ्टवेयर और व्यावसायिक प्रक्रियाओं में मानव संसाधन की आवश्यकता कम हो रही है, जिसका असर रोजगार पर भी दिखाई दे रहा है।
वित्तीय मोर्चे पर भी माइक्रोसॉफ्ट के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। वर्ष 2026 में कंपनी के शेयरों में लगभग 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले कुछ वर्षों में उसका कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष के लिए लगभग 190 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान जताया है, जो बाजार की अपेक्षाओं से अधिक है। ऐसे में निवेशकों का दबाव बढ़ गया है कि AI पर किए जा रहे भारी निवेश से बेहतर वित्तीय परिणाम सामने आएं।
यह पहली बार नहीं है जब माइक्रोसॉफ्ट ने कर्मचारियों की संख्या में कमी की है। इससे पहले इसी वर्ष कंपनी लगभग 9,000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेपरेशन कार्यक्रम की पेशकश कर चुकी है। कंपनी हर वर्ष वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद अपनी लागत और संसाधनों की समीक्षा करते हुए संगठनात्मक बदलाव करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Azure प्लेटफॉर्म और AI तकनीकों पर माइक्रोसॉफ्ट का दांव भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा है। हालांकि मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें, बढ़ती पूंजीगत लागत और Xbox जैसे उत्पादों की अपेक्षाकृत कमजोर मांग कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि AI पर किया गया यह भारी निवेश कंपनी की दीर्घकालिक वृद्धि को गति देता है या लागत नियंत्रण के लिए कर्मचारियों की छंटनी का दौर आगे भी जारी रहता है।








