
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गबन और अनियमितताओं के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की नौ पृष्ठों की अंतरिम जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। ट्रस्ट की हालिया बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद इसके प्रमुख निष्कर्ष सार्वजनिक हुए हैं। रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया कई गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है।
SIT के अनुसार, भेंट राशि की गणना के दौरान चोरी होने के प्रारंभिक साक्ष्य मिले हैं। जांच में शामिल CCTV फुटेज में लगभग 70 ऐसे अवसर चिन्हित किए गए हैं, जिनमें गणना कार्य से जुड़े कुछ कर्मी नोट छिपाते या हटाते हुए दिखाई देने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोई एक-दो बार की घटना नहीं बल्कि 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच लगातार दोहराई गई कथित गतिविधि थी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रस्ट और बैंक के बीच निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तथा आपसी समझौते (MoU) के बावजूद हंडी खोलने, धनराशि की गणना और बैंक में जमा कराने तक की सुरक्षा व्यवस्था का कथित रूप से पालन नहीं किया गया। जांच एजेंसी ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठाए हैं।
SIT ने अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा की भूमिका संदिग्ध बताते हुए इनके विरुद्ध आपराधिक दुर्विनियोग और आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की है। वहीं वरिष्ठ स्तर पर डॉ. अनिल मिश्रा को पर्यवेक्षणीय विफलता के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके अतिरिक्त सुभाग श्रीवास्तव तथा रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू की अनौपचारिक नियंत्रण व्यवस्था को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
हालांकि SIT ने स्पष्ट किया है कि यह केवल अंतरिम रिपोर्ट है और जांच अभी जारी है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण हो सकेगा। फिलहाल इस घटनाक्रम ने मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं।








