
लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) प्रशासन ने परिसर में वर्षों से मौजूद छह मजारों को औपचारिक रूप से लावारिस घोषित करते हुए उन्हें हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। 15 दिन की अंतिम मोहलत पूरी होने के बाद अब प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में रजिस्ट्रार को रिपोर्ट भेजकर मजारों को शिफ्ट करने की संस्तुति भी दे दी गई है।
प्रशासन ने इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार कार्रवाई करने का दावा किया है। केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और संबंधित पक्षों को तीन बार सार्वजनिक नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। हालांकि एक मजार के प्रबंधक को छोड़कर किसी भी पक्ष ने कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया। वह प्रबंधक भी अपनी दावेदारी के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सका।
इसके बाद प्रशासन ने सभी छह मजारों को लावारिस मानते हुए उन्हें हटाने का निर्णय लिया है। हालांकि परिसर में स्थित दो प्राचीन और विधिवत मान्यता प्राप्त मजारों को इस कार्रवाई से बाहर रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई केवल उन संरचनाओं तक सीमित है, जिनका कोई कानूनी आधार या देखरेख करने वाला पक्ष सामने नहीं आया।
KGMU प्रशासन ने पूरे मामले की जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार को भी दे दी है और पुलिस बल की मांग की है, ताकि शिफ्टिंग की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की जा सके। अप्रैल माह में ही इन मजारों को अवैध घोषित कर हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, जो अब अंतिम चरण में पहुंच गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि कार्रवाई के दौरान यदि किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न की गई तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस बल की उपलब्धता के अनुसार जल्द ही इन संरचनाओं को निर्धारित स्थान पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।







