
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और प्रधानमंत्री की ऊर्जा संरक्षण की अपील के बीच अब इसका असर देश की राजधानी दिल्ली में भी दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने ईंधन की खपत कम करने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने के लिए एक व्यापक ‘एक्शन प्लान’ लागू करने का निर्णय लिया है।
सरकार का लक्ष्य केवल ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली को पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक अनुशासन के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करना भी है।
नई नीति के तहत सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही अब आधी आधिकारिक बैठकों को वर्चुअल मोड में आयोजित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे अधिकारियों की अनावश्यक आवाजाही कम होगी और समय तथा ईंधन दोनों की बचत होगी।
ईंधन बचत की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए हर सोमवार को ‘नो व्हीकल डे’ घोषित किया गया है। इस दिन सरकारी अधिकारी निजी और सरकारी वाहनों का उपयोग नहीं करेंगे और मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन से कार्यालय पहुंचेंगे। इसके लिए विशेष बस सेवाओं की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि सुचारु आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।
इसके अलावा, सरकारी अधिकारियों के पेट्रोल और डीजल कोटे में 20 प्रतिशत की कटौती का निर्णय भी लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासन में अनुशासन लाने और अनावश्यक ईंधन खपत को रोकने के लिए जरूरी है।
सबसे अहम बात यह है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वयं उदाहरण पेश करते हुए अपने काफिले को भी छोटा कर दिया है। अब मुख्यमंत्री के काफिले में केवल चार वाहन शामिल होंगे। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि राजधानी की सड़कों पर ट्रैफिक दबाव भी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।
सरकार का यह पूरा ‘एक्शन प्लान’ एक तरह से प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव का संकेत माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक और जिम्मेदार उपयोग के जरिए संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है





