
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। यह सूची साढ़े पांच महीने तक चले व्यापक सत्यापन, आपत्तियों के निस्तारण और नए पंजीकरण की प्रक्रिया के बाद तैयार की गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में अब कुल 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 मतदाता दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया 166 दिनों तक चली, जिसमें मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट और शुद्ध करने का काम किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में नए मतदाता जोड़े गए, जबकि मृतक, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नामों को हटाया गया। इसी वजह से सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
आंकड़ों के अनुसार, 2024 की तुलना में इस बार लाखों नए मतदाता जुड़े हैं, जबकि लगभग 2.06 करोड़ नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इससे पहले अक्टूबर में जब सूची फ्रीज की गई थी, तब कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 15.44 करोड़ थी।
नए आंकड़ों के अनुसार, पुरुष मतदाता 7 करोड़ 30 लाख 71 हजार 61 (54.54%) और महिला मतदाता 6 करोड़ 9 लाख 9 हजार 525 (45.46%) हैं। इस बार जेंडर रेशियो घटकर 834 रह गया है, जो पहले 866 था।
अधिकारियों के अनुसार, महिलाओं की संख्या में वृद्धि के बावजूद अनुपात में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, पुरुष मतदाताओं की संख्या में 42 लाख से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
प्रदेश के कई जिलों में मतदाताओं की संख्या में खास बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रयागराज में 3 लाख 29 हजार से अधिक, लखनऊ में 2 लाख 85 हजार से अधिक, बरेली में 2 लाख 57 हजार से अधिक, गाजियाबाद में 2 लाख 43 हजार से अधिक और जौनपुर में 2 लाख 37 हजार से अधिक नए मतदाता जुड़े हैं।
निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन नागरिकों का नाम सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं। इसके अलावा कोई भी व्यक्ति https://electoralsearch.eci.gov.in/ वेबसाइट पर जाकर अपना नाम ऑनलाइन चेक कर सकता है।
यह पूरी प्रक्रिया विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम-2026 के तहत की गई, जिसकी घोषणा 27 अक्टूबर 2025 को हुई थी। इसके बाद गणना चरण 4 नवंबर 2025 से 26 दिसंबर 2025 तक चला। मसौदा मतदाता सूची 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित की गई, जिसके बाद दावा और आपत्ति की अवधि 6 मार्च 2026 तक चली।
निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह पूरी कवायद मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए की गई है, ताकि आगामी चुनावों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को कम किया जा सके।





