
पुणे। भारतीय सेना प्रमुख उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और वर्तमान में केवल संघर्ष विराम जैसी स्थिति बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना संयुक्त रूप से “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” चलाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सेना प्रमुख ने कहा कि इस अभियान ने दुनिया के सामने भारत की सैन्य क्षमता और जवाबी कार्रवाई की नई मिसाल पेश की है।
पुणे के खड़कवासला स्थित एनडीए में आयोजित 150वीं पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह मानक तय कर दिया है कि भारत किसी भी उकसावे या हमले का किस प्रकार जवाब देता है। उन्होंने नए सैन्य अधिकारियों से कहा कि वे अपने पूरे करियर में इस मानक को बनाए रखने का प्रयास करें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।
समारोह में 355 कैडेट्स ने पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया। इस दौरान शानदार मार्च पास्ट के साथ भारतीय वायुसेना के सुखोई लड़ाकू विमानों, चेतक हेलिकॉप्टरों, सारंग एरोबेटिक्स टीम और आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम ने आकर्षक प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में सैन्य परंपरा, अनुशासन और आधुनिक युद्ध कौशल का अनूठा संगम देखने को मिला।
अपने संबोधन में सेना प्रमुख ने आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज का युद्ध पूरी तरह पारदर्शी हो चुका है। दुनिया भर की निगाहें हर गतिविधि पर रहती हैं और 24 घंटे निगरानी संभव है। ऐसे में सैनिकों की तैनाती, सैन्य अभियानों की योजना और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि उनकी शुरुआत दिमाग और रणनीति से होती है।
जनरल द्विवेदी ने सूचना युद्ध यानी इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत उसके नागरिकों और संस्थाओं के बीच विश्वास होता है। जब पूरा देश एकजुट होकर सही सूचनाओं पर भरोसा करता है, तब विरोधी ताकतों के दुष्प्रचार को आसानी से विफल किया जा सकता है।
उन्होंने भविष्य के युद्धों में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। सेना प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध केवल जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षेत्र और लोगों की सोच को प्रभावित करने वाले मोर्चों पर भी लड़े जाएंगे। इसलिए भारतीय सेना तेजी से नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रही है।








