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यूपी विधानसभा में स्वास्थ्य सेवाओं पर जोरदार बहस: संग्राम यादव और माता प्रसाद पांडेय ने उठाए गंभीर सवाल

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उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मुद्दों पर जोरदार चर्चा देखने को मिली। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता प्रतिपक्ष, माता प्रसाद पांडेय, और अन्य विधायकों ने स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए, जिसका जवाब उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने सिलसिलेवार तरीके से दिया। बृजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 के बाद से स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है। उन्होंने राज्य के अस्पतालों में बढ़ती संख्या की ओर इशारा करते हुए दावा किया कि मरीजों और दवाइयों की संख्या पहले से अधिक हो गई है।

इस बीच, बृजेश पाठक ने सपा के विधायक कमाल अख्तर को संबोधित करते हुए कहा, “खुदा की नियामत बंद करिए,” और यह भी कहा कि जब तक जनसंख्या बढ़ती रहेगी, तब तक समस्याएं बनी रहेंगी। उन्होंने समाज में परिवार नियोजन के संसाधनों के उपयोग की जरूरत को जोर देते हुए कहा कि यह मुद्दा महत्वपूर्ण है और इसका समाधान परिवार नियोजन के जरिए ही हो सकता है। हालांकि, कमाल अख्तर ने पलटवार करते हुए कहा कि जिनकी जनसंख्या सबसे अधिक बढ़ रही है, वे ही इसके लिए जिम्मेदार हैं।

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सपा विधायक कमाल अख्तर ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर चर्चा करते हुए कहा कि अस्पतालों में दवाइयों की कमी है और मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। आयुष्मान कार्ड के प्रचार के बावजूद, मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है, और कई अस्पताल इलाज देने से मना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, और फार्मासिस्टों के पास इलाज की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जो मरीजों के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा, उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की समस्याओं के समाधान के लिए बड़ी मात्रा में फार्मासिस्टों की आवश्यकता की बात की।

सपा के अन्य विधायक संग्राम सिंह यादव ने भी स्वास्थ्य सेवा की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के शासनकाल में 100 शैय्या वाले अस्पतालों का निर्माण किया गया था, लेकिन भाजपा सरकार के आने के बाद इन अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी हो गई। उन्होंने यह भी कहा कि सुदूर इलाकों के लोगों को इलाज के लिए मुख्यालय जाने में कठिनाई हो रही है, और वहां के अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।

नेता प्रतिपक्ष, माता प्रसाद पांडेय ने भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने सिद्धार्थनगर में बने मेडिकल कॉलेज की स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि वहां योग्य डॉक्टरों की कमी है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात से आए प्रिंसिपल का ध्यान मेडिकल कॉलेज की बजाय कमीशनखोरी पर अधिक है।

इन सभी मुद्दों के बीच, स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए चर्चा जारी रही। सभी नेताओं ने स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए राज्य सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।

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