
नई दिल्ली। विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए देश की रोजगार व्यवस्था को अधिक मजबूत, प्रभावी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने को लेकर नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च एंड चेंज फाउंडेशन (NFPRC Foundation) द्वारा सांसदों एवं विधायकों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य भारत की रोजगार व्यवस्था से जुड़े मौजूदा मुद्दों, नीतिगत चुनौतियों और संभावित सुधारों पर जनप्रतिनिधियों के साथ व्यापक चर्चा करना रहा। इस दौरान रोजगार सृजन, युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने, कौशल विकास तथा बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप रोजगार नीतियों को प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
NFPRC Foundation के बोर्ड सदस्य श्री अभिनव [उपनाम उपलब्ध नहीं] ने कार्यशाला के दौरान रोजगार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नीति निर्माण में व्यापक दृष्टिकोण और जमीनी स्तर की जरूरतों को शामिल किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में रोजगार और मानव संसाधन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला में इस बात पर भी चर्चा हुई कि देश की बड़ी युवा आबादी को केवल रोजगार तलाशने वाला वर्ग बनाने के बजाय उसे आर्थिक विकास में सक्रिय भागीदार बनाया जाए। इसके लिए कौशल, शिक्षा, उद्यमिता और उद्योग की जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
NFPRC Foundation की ओर से कहा गया कि भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रोजगार से जुड़ी नीतियों में दीर्घकालिक सोच और निरंतर सुधार जरूरी हैं। केंद्र और राज्य स्तर पर नीति निर्माताओं, जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों तथा उद्योग जगत के बीच संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
कार्यशाला में शामिल जनप्रतिनिधियों के साथ रोजगार व्यवस्था को लेकर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और भविष्य में नीतिगत स्तर पर उपयोगी सुझावों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
NFPRC Foundation का कहना है कि इस तरह के संवाद और कार्यशालाएं देश की रोजगार व्यवस्था को अधिक समावेशी, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के अनुकूल बनाने की दिशा में उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं। विकसित भारत@2047 के लक्ष्य के साथ रोजगार के नए अवसरों का निर्माण और युवाओं की क्षमता का बेहतर उपयोग देश की आर्थिक प्रगति के महत्वपूर्ण आधारों में शामिल है।








