Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

‘Gen-Z देशविरोधी नहीं, देशभक्त है’, भागवत बोले- संवाद की कमी से हुआ आंदोलन

संघ प्रमुख मोहन भागवत
संघ प्रमुख मोहन भागवत
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Rishabh Rai

मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश के युवाओं, विशेषकर Gen-Z और Gen-Alpha पीढ़ी को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि यह पीढ़ी पुरानी पीढ़ी से भी अधिक देशभक्त और ईमानदार है। उन्होंने कहा कि युवाओं की बात सुनना और उनसे संवाद बनाए रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। अगर संवाद पहले होता तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन जैसी स्थिति पैदा नहीं होती।

मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने कहा कि आंदोलन तब होते हैं, जब बातचीत के रास्ते बंद हो जाते हैं। यदि सरकार पहले ही संबंधित पक्षों से संवाद कर ले, तो आंदोलन की नौबत नहीं आती। उन्होंने आंदोलन को लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद का एक माध्यम बताया।

Advertisement Box

उन्होंने कहा कि आज की Gen-Z सवाल पूछती है और जवाब चाहती है। यह बदलाव स्वाभाविक है और इसे नकारने के बजाय समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि युवाओं के प्रदर्शन को राष्ट्रविरोध से जोड़ना उचित नहीं है। यदि युवा सड़कों पर उतर रहे हैं तो उसके पीछे कोई वास्तविक पीड़ा या चिंता होती है। ऐसे आंदोलनों को व्यवस्था में सुधार के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।

नीट पेपर लीक के बाद हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में भागवत ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाचारों के अनुसार कुछ उपद्रवी भी शामिल थे, लेकिन आंख मूंदकर किसी पर भरोसा करना हो तो वह युवाओं पर करेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं के प्रति अविश्वास का माहौल नहीं बनना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाया जाना चाहिए। गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराना समाज और सरकार दोनों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने के बाद ही पाठ्यक्रम जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।

भागवत ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी अपनी राय रखते हुए कहा कि युद्ध के समय सरकार का साथ देना चाहिए, लेकिन संघर्ष समाप्त होने के बाद बातचीत के रास्ते खुले रहने चाहिए। उन्होंने समान-लैंगिक विवाह के मुद्दे पर कहा कि किसी भी सामाजिक बदलाव से पहले समाज को उसके लिए तैयार करना आवश्यक है। वहीं महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि उन्हें समान अवसर और नेतृत्व में बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए।

संघ प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब युवाओं से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में हैं और विभिन्न संगठनों द्वारा शिक्षा तथा रोजगार को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है।

 

आज का राशिफल

वोट करें

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दुनिया के सामने रोज बेनकाब हो रहे पाकिस्तान को दी गई एक अरब डॉलर की मदद पर क्या अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को फिर से विचार करना चाहिए?

और भी पढ़ें

WhatsApp