
नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की नेता शेख हसीना ने घोषणा की है कि वह इसी वर्ष दिसंबर में अपने देश लौटेंगी। भारत में रह रही शेख हसीना ने पहली बार वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि वह अपनी गिरफ्तारी, जेल या जान को खतरा जैसे किसी भी संभावित परिणाम का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
शेख हसीना ने कहा कि वह विदेश में रहकर अपने समर्थकों और देशवासियों की परेशानियां नहीं देख सकतीं। उन्होंने कहा, “वे मुझे मार सकते हैं, जेल में डाल सकते हैं और मेरे खिलाफ राजनीतिक मामले दर्ज कर सकते हैं, लेकिन डर मेरे कर्तव्य को तय नहीं कर सकता।” उन्होंने अपने अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि 1971 में वह अपनी मां के साथ जेल में रहीं और 1975 में उन्होंने अपने पूरे परिवार को खो दिया था। इसलिए अब व्यक्तिगत सुरक्षा उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता नहीं है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी पार्टी अवामी लीग पर लगी सरकारी पाबंदियां हटाने, हिरासत में बंद नेताओं की रिहाई और राजनीतिक मामलों को वापस लेने की मांग भी की। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करना जरूरी है और राजनीतिक मतभेदों का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार ने खुद को अलग बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस या उसमें व्यक्त विचारों से भारत सरकार का कोई संबंध नहीं है और यह उनका निजी कार्यक्रम था।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी, जिसके बाद वह भारत आ गई थीं। बाद में हुए चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेतृत्व में नई सरकार बनी, जबकि अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई।
इसी बीच भारत सरकार ने यह भी पुष्टि की है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सितंबर में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है। ऐसे में दिसंबर में शेख हसीना की प्रस्तावित वापसी को बांग्लादेश की राजनीति और दक्षिण एशियाई कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।








