
आपातकाल जैसी स्थिति किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं : सुरेश खन्ना
आपातकाल की 51वीं बरसी पर प्रेस क्लब में आयोजित हुआ ‘काला दिवस’ कार्यक्रम
लखनऊ। आपातकाल की 51वीं बरसी पर लोकतंत्र सेनानियों ने प्रेस क्लब में एकत्र होकर काला दिवस मनाया और लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया।
लोकतंत्र सेनानी समिति के प्रदेश अध्यक्ष ब्रज किशोर मिश्र ने कहा कि 25 जून 1975 को देश में लगाए गए आपातकाल ने भारत को एक बार फिर गुलामी की बेड़ियों में जकड़ दिया था। उन्होंने कहा कि आपातकाल का विरोध करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक नेताओं और लोकतंत्र समर्थकों को जेलों में बंद कर अमानवीय यातनाएं दी गईं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि स्वतंत्र भारत में आपातकाल जैसी स्थिति किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि आपातकाल लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या का प्रतीक था। उस दौर में अहिंसक आंदोलन करने वालों को जेलों में डाल दिया गया, उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी गईं। लोकनायक जयप्रकाश नारायण सहित अनेक लोकतंत्र सेनानियों ने कठिन संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब इतनी जागरूक है कि भविष्य में कोई भी सरकार आपातकाल जैसी तानाशाही थोपने का साहस नहीं कर सकेगी।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने कहा कि लोकतंत्र भारत की आत्मा है। आपातकाल से सबक लेते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय था।
उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्त पी.एन. द्विवेदी ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र सेनानियों को अमानवीय यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने तानाशाही के आगे झुकने से इनकार कर दिया। उनके संघर्ष और बलिदान के कारण ही लोकतंत्र की पुनर्स्थापना संभव हो सकी।
लोकतंत्र सेनानी समिति के प्रदेश महामंत्री रामाशंकर त्रिपाठी ने आपातकाल के 19 महीनों को याद करते हुए कहा कि उस समय जेलों में बंद लोगों को यह विश्वास नहीं था कि वे कब रिहा होंगे, लेकिन लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहा। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में कोई भी अलोकतांत्रिक शक्ति लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास करेगी तो देश का युवा वर्ग उसका डटकर मुकाबला करेगा।
कार्यक्रम में संतराम त्रिवेदी, शिवकुमार भारती, अजीत सिंह, सुभाष आनंद, रामसनेही कनौजिया, चंद्रशेखर कटियार, माताप्रसाद तिवारी, मनोरमा मिश्रा, टिकम सिंह, चेतराम, राजकुमार चतुर्वेदी, मकबूल बेग, वीरेन्द्र कटियार, रामलखन मिश्र, अरुण कटियार, हरिश्चंद्र पांडेय, शिवराम सिंह, मधु राठौर, कृष्ण मुरारी पाठक, सतीश कटियार, आशा दुबे, राजेंद्र त्रिपाठी, राम सिंह बाथम, प्रेमा बाथम, शंकरलाल सक्सेना, श्रीराम यादव, सम्रादित्य सिंह, रामवृक्ष तिवारी, तारावती अहिरवार, देवता प्रसाद और रमेश्वर दयाल सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोकतंत्र सेनानी उपस्थित रहे।
— रामाशंकर त्रिपाठी
प्रदेश महामंत्री, लोकतंत्र सेनानी समितियह संस्करण समाचार-पत्र प्रकाशन के लिए उपयुक्त और संपादित रूप में तैयार किया गया है।







