
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और कथित जमीन घोटाले को लेकर चल रही जांच के बीच राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने गुरुवार को लखनऊ पहुंचकर विशेष जांच दल (SIT) को कथित जमीन घोटाले से जुड़े 11 दस्तावेज सौंपे। इसके बाद उन्होंने जांच की धीमी रफ्तार और अब तक किसी भी गिरफ्तारी या एफआईआर न होने पर सवाल उठाए।
संजय सिंह ने कहा कि मामले में कई तरह के साक्ष्य सामने आ चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और जमीन सौदों से जुड़े दस्तावेज जांच एजेंसियों को उपलब्ध करा दिए गए हैं। उन्होंने पूछा कि जब जांच में कई तथ्य सामने आ रहे हैं तो अब तक किसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उनके अनुसार, मामले में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया पर चल रही कई खबरों को अफवाह बताया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की चर्चा पर मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव ने स्पष्ट किया कि चंपत राय ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करें।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। अयोध्या में आम आदमी पार्टी के विधायक अनिल झा ने हनुमानगढ़ी के संत राजू दास द्वारा अरविंद केजरीवाल को “कालनेमि” बताए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संत समाज को मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए और अयोध्या की परंपरा सभी श्रद्धालुओं का सम्मान करने की रही है।
वहीं महंत राजू दास ने अपने बयान में कहा कि कुछ लोग राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि एसआईटी जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और जांच रिपोर्ट आने तक धैर्य रखने की अपील की।
फिलहाल पूरा मामला एसआईटी जांच के दायरे में है और सभी की नजर अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो इस विवाद से जुड़े कई सवालों के जवाब दे सकती है।








