
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी। विधानसभा चुनाव के नतीजों में उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को करारी हार का सामना करना पड़ा है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पहली बार राज्य में स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए 294 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की है। TMC को केवल 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जिससे 15 साल बाद ममता बनर्जी के हाथों से सत्ता फिसल गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे जनादेश नहीं बल्कि “साजिश” का परिणाम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलकर लगभग 100 सीटों पर धांधली की है। उनका कहना था कि काउंटिंग सेंटरों पर कब्जा किया गया और उनके पार्टी कार्यकर्ताओं तथा उम्मीदवारों के साथ बदसलूकी की गई। ममता ने यह भी दावा किया कि चुनाव से पहले उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया गया, जगह-जगह छापेमारी हुई और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले किए गए।
उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर भी परोक्ष रूप से आरोप लगाते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में उच्च स्तर पर हस्तक्षेप हुआ है। ममता बनर्जी ने कहा कि भले ही आधिकारिक तौर पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन नैतिक रूप से जीत उनकी ही हुई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, मैं नहीं हारी हूं। मैं राजभवन नहीं जाऊंगी।”
ममता ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने कई सरकारें देखी हैं, लेकिन इस तरह का “अत्याचार” पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआती राउंड की काउंटिंग के बाद ही भाजपा नेताओं ने जीत के दावे करना शुरू कर दिए थे और मतदान केंद्रों के अंदर घुसकर हिंसा की गई।
आगे की रणनीति पर बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग के खिलाफ कदम उठाएगी, हालांकि उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी। साथ ही, एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित करने का भी ऐलान किया गया है, जिसमें पांच सांसदों सहित दस सदस्य शामिल होंगे।
इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां एक ओर भाजपा अपनी ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रही है, वहीं ममता बनर्जी संघर्ष जारी रखने का संकेत दे रही हैं।






