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मई में महंगाई का झटका: गैस सिलेंडर महंगा, जेब पर असर

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Written by
Rishabh Rai

1 मई से देशभर में आम लोगों और कारोबारियों की जेब पर असर डालने वाले कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। सबसे बड़ा झटका कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है। तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में ₹994 तक की बढ़ोतरी कर दी है। राजधानी दिल्ली में अब यह ₹3071.50 में मिल रहा है, जो पहले ₹2078.50 था। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग बिजनेस पर पड़ेगा। ऐसे में बाहर खाना-पीना महंगा हो सकता है और शादियों के खर्च में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

दूसरी तरफ, देश में ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026 भी लागू हो गए हैं, जिससे डिजिटल गेमिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव आया है। सरकार ने इसके तहत Online Gaming Authority of India (OGAI) के गठन का फैसला किया है, जो ऑनलाइन गेम्स को रेगुलेट करेगी। नए नियमों के तहत गेम्स को तीन श्रेणियों-मनी गेम्स, सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स-में बांटा गया है। मनी गेम्स पर रोक लगाई गई है, जबकि अन्य गेम्स के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। साथ ही, उम्र सीमा, पेरेंटल कंट्रोल और टाइम लिमिट जैसे फीचर्स भी जरूरी किए गए हैं, जिससे गेमिंग की लत और धोखाधड़ी पर लगाम लगाई जा सके।

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ईंधन नीति में बदलाव और वैश्विक तेल बाजार में नया समीकरण

ऊर्जा क्षेत्र में भी सरकार ने अहम फैसले लिए हैं। केंद्र सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की है। डीजल पर ड्यूटी ₹55.5 से घटाकर ₹23 प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि ATF पर इसे ₹42 से घटाकर ₹33 प्रति लीटर किया गया है। इससे Reliance Industries और Nayara Energy जैसी भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में फायदा मिल सकता है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

इसी बीच वैश्विक स्तर पर एक बड़ा बदलाव यह हुआ है कि United Arab Emirates ने 1 मई से OPEC और OPEC+ से खुद को अलग कर लिया है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में नई हलचल पैदा कर सकता है। OPEC, जो दुनिया की लगभग 40-50% तेल आपूर्ति को नियंत्रित करता है, उसके नियमों से बाहर होकर UAE अब उत्पादन बढ़ा सकता है। इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ने और कीमतों में नरमी आने की संभावना है।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि उसे सस्ते तेल और नए सप्लाई स्रोतों तक पहुंच मिल सकती है। कुल मिलाकर, मई की शुरुआत आर्थिक और नीतिगत बदलावों के साथ हुई है, जिसका असर आने वाले दिनों में आम आदमी से लेकर बड़े उद्योगों तक देखने को मिलेगा।

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