
नेपाल की राजनीति में मौजूदा घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल मचा दी है। प्रधानमंत्री बालेन शाह की नीतियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं, खासकर भारत के साथ संबंधों को लेकर। हाल ही में लागू की गई कस्टम ड्यूटी नीति ने भारत और नेपाल सीमा पर तनाव बढ़ा दिया है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक और सामाजिक संबंध प्रभावित हो रहे हैं।
तराई क्षेत्रों में जारी विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि यह मुद्दा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक भी बन चुका है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों का जीवन भारत-नेपाल सीमा पर निर्भर करता है, और ऐसे में किसी भी प्रकार का शुल्क बढ़ोतरी सीधे उनके जीवन पर असर डालती है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार अरविंद सिंह तेजावत का मानना है कि नेपाल इस समय वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रहा है। US की बढ़ती दिलचस्पी और चीन का क्षेत्र में प्रभाव, दोनों ही नेपाल के लिए रणनीतिक दबाव पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि… यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका नेपाल को भारत के खिलाफ ‘मोहरा’ बना रहा है, लेकिन यह जरूर है कि नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता बाहरी शक्तियों के लिए अवसर पैदा कर सकती है। ऐसे में प्रधानमंत्री बालेन शाह के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे संतुलित विदेश नीति अपनाएं और देश के हितों को प्राथमिकता दें। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि नेपाल भारत के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को कैसे बनाए रखता है और चीन तथा अमेरिका जैसी बड़ी शक्तियों के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति को कैसे संतुलित करता है






