
तेहरान/यरुशलम। अप्रैल में हुए सीजफायर के करीब दो महीने बाद ईरान और इजराइल के बीच एक बार फिर सैन्य संघर्ष शुरू हो गया है। रविवार रात ईरान ने इजराइल पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया। ईरान की इस कार्रवाई के जवाब में इजराइल ने कुछ ही घंटों के भीतर पश्चिमी और मध्य ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया कि यह हमला लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर इजराइल की हालिया सैन्य कार्रवाई के जवाब में किया गया। मिसाइल हमलों के दौरान इजराइल के विभिन्न हिस्सों में सायरन बजाए गए और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया।
इजराइली सेना ने कहा कि उसने ईरान के उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जहां से मिसाइल संचालन और सैन्य गतिविधियों का संचालन किया जा रहा था। ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, राजधानी तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई शक्तिशाली विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि नुकसान और हताहतों के संबंध में आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
IRGC ने आरोप लगाया कि इजराइल ने अपने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया। वहीं इजराइल ने कहा कि उसकी कार्रवाई पूरी तरह सैन्य लक्ष्यों तक सीमित थी और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईरान ने तेहरान स्थित इमाम खोमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास के एयरस्पेस को बंद कर दिया है। इसके अलावा इराक ने 72 घंटे और सीरिया ने 12 घंटे के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने की घोषणा की है। क्षेत्रीय देशों को आशंका है कि संघर्ष और अधिक फैल सकता है, जिससे नागरिक उड्डयन और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
इस बीच अमेरिका भी घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से संयम बरतने और बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई से बचने की अपील की थी। हालांकि इसके बावजूद इजराइल ने सैन्य अभियान शुरू कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। अप्रैल में हुए सीजफायर के बाद क्षेत्र में शांति की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन ताजा घटनाओं ने एक बार फिर युद्ध की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है।








