
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और भारत निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट पर चुनाव आयोग ने आधिकारिक बयान जारी कर सफाई दी है। आयोग ने कहा है कि वह एक संवैधानिक संस्था है और संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों, नियमों तथा स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करता है। आयोग के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं।
चुनाव आयोग ने कहा कि दस महीने की अवधि में तैयार किए गए कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट और टिप्पणियां सामने रखकर यदि स्वीकृतियों, निर्णयों, निर्देशों और अन्य पहलों के व्यापक समूह को नजरअंदाज किया जाता है, तो इससे तस्वीर का केवल एक पक्ष सामने आता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके कामकाज में आंतरिक नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और जांच-पड़ताल जैसी प्रक्रियाएं नियमित संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
सभी फैसले सहमति से लेने का दावा
आयोग ने अपने बयान में कहा कि यह कई सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था के रूप में काम करता है। निर्णय लेने की प्रक्रिया में संस्थागत जांच और संतुलन की व्यवस्था अपनाई जाती है, ताकि पारदर्शिता, कानूनी प्रावधानों का पालन और कामकाज में आवश्यक सख्ती सुनिश्चित की जा सके।
ECI ने कहा कि पिछले एक साल में आयोग ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इस दौरान विभिन्न निर्देश जारी किए गए और करीब 40 नई पहल शुरू की गईं। इनमें देशभर में मतदाता सूची के संशोधन से जुड़ी गतिविधियां, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत कई चुनावी सुधार शामिल हैं। आयोग के अनुसार, ये सभी कदम पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों के आधार पर उठाए गए हैं।

आंतरिक दस्तावेजों को लेकर दी सफाई
चुनाव आयोग ने कहा कि किसी संवैधानिक संस्था के कामकाज के दौरान तैयार होने वाले लिखित नोट और आंतरिक टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, इन दस्तावेजों को अंतिम निर्णय के संदर्भ से अलग करके देखने पर प्रक्रिया की पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होती।
आयोग ने यह भी कहा कि उसके सभी कार्य कानून और आयोग के निर्देशों के अनुरूप किए गए हैं। मतदाता सूची के संशोधन और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसले भी निर्धारित संवैधानिक और कानूनी ढांचे के तहत लिए गए हैं।
संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने की प्रतिबद्धता
अपने आधिकारिक बयान में चुनाव आयोग ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग देश के लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को पूरी तरह समझता है। आयोग ने कहा कि वह अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ करता रहेगा।






