
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा और विधान परिषद की खाली होने वाली सीटों को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। अगले दो महीनों में राज्यसभा की 10 और विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव और चयन की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। इसे देखते हुए सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक गणित को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राज्यसभा की 10 सीटों का मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इन सीटों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की 8, समाजवादी पार्टी (सपा) की 1 और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की 1 सीट शामिल है।
राज्यसभा चुनाव में विधानसभा सदस्यों की संख्या के आधार पर उम्मीदवारों के जीतने का गणित तय होता है। ऐसे में यूपी विधानसभा में मौजूदा दलगत स्थिति इन चुनावों में अहम भूमिका निभाएगी। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों की संख्या के चलते सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, जबकि विपक्षी दल भी अपने हिस्से की सीटों को बनाए रखने और नए समीकरण बनाने की कोशिश करेंगे।
इन सीटों के अलावा उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने वाली हैं। विधान परिषद में खाली होने वाली सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया के साथ-साथ नामित सदस्यों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो सकती हैं।
राज्यसभा की सीटों का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर भी अटकलें शुरू हो सकती हैं। राजनीतिक दल अपने संगठन, सामाजिक समीकरण और आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन की रणनीति बना सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव भी नजदीक है। ऐसे में राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव को केवल सदन की संख्या के लिहाज से ही नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दलों की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, अंतिम तस्वीर चुनाव कार्यक्रम, उम्मीदवारों के नाम और विधानसभा में उस समय मौजूद दलगत संख्या के आधार पर ही स्पष्ट होगी। अगले कुछ हफ्तों में टिकट के दावेदारों और संभावित उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।








