Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

मोदी-शी मुलाकात से रिश्तों में नई गर्माहट के संकेत, लेकिन सीमा विवाद की चुनौती बरकरार

मोदी-शी मुलाकात से रिश्तों में नई गर्माहट के संकेत
मोदी-शी मुलाकात से रिश्तों में नई गर्माहट के संकेत
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के रिश्तों को लेकर एक बार फिर दुनिया की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर रही। करीब सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग रविवार को स्वदेश रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन सुना और ब्रिक्स देशों के नेताओं के साथ सामूहिक तस्वीर में हिस्सा लिया। हालांकि यात्रा छोटी रही, लेकिन दोनों नेताओं के बीच हुई 45 मिनट की द्विपक्षीय बातचीत ने भारत-चीन संबंधों में संभावित नई दिशा के संकेत दिए हैं।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मोदी और शी ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए। दोनों नेताओं ने यह भी दोहराया कि मतभेदों को विवादों में नहीं बदलने देना चाहिए। यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते सबसे मुश्किल दौर से गुजरे हैं।

Advertisement Box

बैठक में आर्थिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत लंबे समय से चीन के साथ बढ़ते व्यापार असंतुलन को लेकर अपनी चिंता जाहिर करता रहा है। इसके अलावा आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियां भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण मुद्दा हैं। मोदी और शी ने एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया। इससे संकेत मिलता है कि सीमा विवाद के साथ-साथ दोनों देश आर्थिक रिश्तों को भी स्थिर करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

शी जिनपिंग का भारत दौरा अचानक नहीं था, बल्कि पिछले कुछ समय से चल रही उच्चस्तरीय कूटनीतिक गतिविधियों की अगली कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता सहित कई संपर्कों के जरिए दोनों पक्ष तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले वर्ष 31 अगस्त को चीन के तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर मोदी और शी की व्यापक बातचीत भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा थी।

इसके बावजूद भारत और चीन के बीच चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। सीमा पर विश्वास बहाली अभी सबसे बड़ी परीक्षा है। अरुणाचल प्रदेश में चीन की सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय दावों को लेकर भारत की चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे में केवल राजनीतिक स्तर पर बातचीत से संबंधों में पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटना आसान नहीं होगा।

शी की भारत यात्रा से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि दोनों देश संवाद और संपर्क को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। आने वाले समय में इस राजनीतिक समझ को सीमा पर शांति, व्यापार संतुलन और आपसी विश्वास में कितना बदला जा सकता है, यही भारत-चीन संबंधों की अगली कसौटी होगी।

आज का राशिफल

वोट करें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एपल प्रमुख टिम कुक से आईफोन का निर्माण भारत में न करने को कहा है। क्या इसका असर देश के स्मार्टफोन उद्योग पर पड़ सकता है?

और भी पढ़ें

WhatsApp