
नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत की अपनी संक्षिप्त यात्रा पूरी कर स्वदेश रवाना हो गए। करीब सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत ब्रिक्स के अन्य नेताओं के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। रवाना होने से पहले उन्होंने भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन सुना और ब्रिक्स नेताओं के साथ सामूहिक तस्वीर भी खिंचवाई।
शी जिनपिंग शनिवार दोपहर एयर चाइना की विशेष उड़ान से नई दिल्ली पहुंचे थे। उनके साथ चीन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया था। एयरपोर्ट से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वह अपनी होंगछी एन701 कार से भारत मंडपम पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक द्विपक्षीय बैठक हुई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई इस बातचीत में मोदी और शी ने भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने माना कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में तब्दील नहीं होने देना चाहिए। बातचीत में आर्थिक संबंधों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठे। दोनों पक्षों ने व्यापार असंतुलन और आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शी की भारत यात्रा ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा। सीमा पर सैन्य तैनाती और अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की गतिविधियों के कारण दोनों देशों के बीच अविश्वास की स्थिति बनी रही है।
हाल के महीनों में दोनों देशों ने संबंधों को पटरी पर लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस दिशा में उच्चस्तरीय संपर्क भी बढ़ा है। बीजिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता भी हुई थी। इससे पहले मोदी और शी ने चीन के तियानजिन में पिछले वर्ष 31 अगस्त को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर व्यापक बातचीत की थी।
हालांकि, सीमा विवाद और अरुणाचल प्रदेश में चीन की सैन्य गतिविधियों को लेकर भारत की चिंताएं अभी कायम हैं। ऐसे में शी की यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में जारी सुधार प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी संक्षिप्त यात्रा ने यह संकेत जरूर दिया है कि नई दिल्ली और बीजिंग टकराव के बजाय संवाद के रास्ते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।







