
नई दिल्ली। मंगल ग्रह की सतह से नासा के क्यूरियोसिटी रोवर द्वारा भेजी गई एक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। तस्वीर में मंगल की पथरीली पहाड़ियों के ऊपर एक काली और अजीबोगरीब आकृति दिखाई दे रही है। दूर से देखने पर यह समुद्र में तैरने वाली जेलीफिश जैसी नजर आती है। तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर एलियन जीवन तक की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इस आकृति की तुलना हॉलीवुड फिल्मों में दिखाए जाने वाले एलियन जीवों से भी की।
हालांकि, वैज्ञानिक जांच में इस रहस्यमयी आकृति का सच सामने आ गया है। नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक मंगल की सतह पर कोई जेलीफिश जैसा जीव नहीं उड़ रहा था। तस्वीर में दिखाई दे रही आकृति वास्तव में कैमरा सेंसर पर कॉस्मिक किरण के प्रभाव से बना एक इमेजिंग आर्टिफैक्ट है।
एक ही तस्वीर में दिखाई दी आकृति
यह तस्वीर नासा के क्यूरियोसिटी रोवर के नैवकैम कैमरे से ली गई थी। तस्वीर को 20 अगस्त 2023 को रिकॉर्ड किया गया था। वैज्ञानिकों ने इस तस्वीर की तुलना उसी स्थान पर लिए गए दूसरे फ्रेम से की। जांच में पता चला कि रहस्यमयी आकृति केवल एक ही तस्वीर में दिखाई दी।
इससे कुछ सेकंड पहले और बाद में लिए गए फ्रेम में यह आकृति मौजूद नहीं थी। उपलब्ध तस्वीरों के समय की तुलना करने पर सामने आया कि जेलीफिश जैसी आकृति वाले फ्रेम से कुछ सेकंड पहले और बाद में कैमरे ने उसी क्षेत्र की तस्वीरें ली थीं, लेकिन उनमें ऐसा कोई साया नहीं दिखाई दिया।
यही तथ्य वैज्ञानिकों के लिए इस रहस्य को समझने में सबसे अहम साबित हुआ। अगर यह मंगल की सतह पर मौजूद कोई वास्तविक वस्तु या जीव होता, तो उसके आसपास के फ्रेम में भी उसके दिखाई देने की संभावना रहती। लेकिन केवल एक फ्रेम में नजर आने से संकेत मिला कि यह मंगल की जमीन पर मौजूद वस्तु नहीं, बल्कि कैमरे में रिकॉर्ड हुई एक तकनीकी घटना थी।
कॉस्मिक किरणों से बना ‘ब्लैक ग्लिच’
वैज्ञानिकों के मुताबिक अंतरिक्ष में लगातार हाई-एनर्जी पार्टिकल्स यानी कॉस्मिक किरणें मौजूद रहती हैं। ये कण अंतरिक्ष में घूमते रहते हैं और अंतरिक्ष यान तथा उनके उपकरणों से टकरा सकते हैं।
धरती पर हमारा चुंबकीय क्षेत्र और वायुमंडल इन कणों से काफी हद तक सुरक्षा प्रदान करते हैं। लेकिन मंगल की स्थिति अलग है। मंगल के पास पृथ्वी जैसा वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र नहीं है और उसका वायुमंडल भी पृथ्वी की तुलना में बेहद पतला है। ऐसे में अंतरिक्ष से आने वाले ऊर्जावान कण मंगल की सतह पर मौजूद रोवर के कैमरा सेंसर तक पहुंच सकते हैं।
जब कोई हाई-एनर्जी पार्टिकल कैमरे के सेंसर से टकराता है तो वह सेंसर में एक असामान्य सिग्नल पैदा कर सकता है। तस्वीर में यह सिग्नल चमकीले बिंदु, लाइन या कभी-कभी किसी गहरे धब्बे के रूप में दिखाई दे सकता है। इसी तरह के एक डार्क आर्टिफैक्ट ने इस तस्वीर में जेलीफिश जैसी आकृति का भ्रम पैदा किया।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे भ्रम
मंगल ग्रह की तस्वीरों में अजीब आकृतियां दिखाई देना कोई नई बात नहीं है। क्यूरियोसिटी और परसेवेरेंस जैसे रोवर लगातार मंगल की सतह की तस्वीरें पृथ्वी पर भेजते हैं। कई तस्वीरों में चट्टानों के आकार इंसानी चेहरे, खोपड़ी, हड्डियों या दूसरी परिचित चीजों जैसे दिखाई दिए हैं।
विज्ञान में किसी प्राकृतिक आकृति को किसी जानी-पहचानी वस्तु या जीव के रूप में देखने की प्रवृत्ति को पैरिडोलिया कहा जाता है। हालांकि, इस मामले में वैज्ञानिकों का मानना है कि जेलीफिश जैसी आकृति केवल चट्टान के आकार के कारण नहीं बनी, बल्कि कैमरा सेंसर पर कॉस्मिक पार्टिकल के प्रभाव ने इसे तस्वीर में पैदा किया।
वैज्ञानिकों ने भी बताया इमेजिंग आर्टिफैक्ट
जेपीएल के इमेजिंग साइंटिस्ट जस्टिन मैकी के मुताबिक रोवर द्वारा खींची गई तस्वीरों में ऐसे ब्राइट स्पॉट और दूसरी असामान्य आकृतियां समय-समय पर दिखाई देती रहती हैं। हजारों तस्वीरों के बीच इस तरह के कॉस्मिक-रे प्रभाव वाले फ्रेम मिलना असामान्य नहीं है।
आमतौर पर कॉस्मिक किरणों के कारण तस्वीर में सफेद चमकते बिंदु या धारियां दिखाई दे सकती हैं। हालांकि कुछ परिस्थितियों में सेंसर पर पड़ने वाला प्रभाव डार्क यानी काले धब्बे के रूप में भी रिकॉर्ड हो सकता है।
साल 2023 में क्यूरियोसिटी रोवर के दूसरे कैमरा फुटेज में भी इसी तरह का छोटा ब्लैक आर्टिफैक्ट रिकॉर्ड किया गया था। वैज्ञानिकों के अनुसार जेलीफिश जैसी आकृति वाला यह फ्रेम भी उसी तरह के कैमरा-सेंसर प्रभाव का उदाहरण है।
एलियन जीवन का सबूत नहीं
तस्वीर के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भले ही एलियन जीवन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हों, लेकिन वैज्ञानिक जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो यह साबित करे कि मंगल पर कोई जेलीफिश जैसा जीव मौजूद है। आकृति का सिर्फ एक फ्रेम में दिखाई देना और उसके आसपास के फ्रेम में गायब होना इस बात की ओर इशारा करता है कि यह वास्तविक जीव या वस्तु नहीं थी।
मंगल की तस्वीरें अक्सर लोगों की कल्पना को आकर्षित करती हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए किसी भी असामान्य आकृति की पुष्टि करने के लिए कई फ्रेम, कैमरा डेटा और परिस्थितियों का अध्ययन जरूरी होता है। इस मामले में भी तस्वीर ने भले ही पहली नजर में मंगल पर किसी रहस्यमयी जीव की मौजूदगी का अहसास कराया हो, लेकिन जांच के बाद इसका संबंध कॉस्मिक किरण से पैदा हुए कैमरा आर्टिफैक्ट से निकला।
इस तरह मंगल की ‘जेलीफिश’ का रहस्य तो सुलझ गया, लेकिन लाल ग्रह की सतह और उसके वातावरण से जुड़े वैज्ञानिक रहस्य अभी भी दुनिया के लिए बड़े सवाल बने हुए हैं।






