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BRICS में एक मंच पर मोदी, जिनपिंग, पुतिन और पेजेशकियान, दुनिया को भारत का कूटनीतिक संदेश

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Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की मौजूदगी ने वैश्विक कूटनीति का ध्यान अपनी ओर खींचा। सम्मेलन से सामने आई तस्वीरों में मोदी, जिनपिंग और पुतिन एक-दूसरे का हाथ थामे और मुस्कुराते हुए नजर आए। अलग-अलग वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग रुख रखने वाले इन देशों के नेताओं का एक मंच पर आना भारत की संतुलित विदेश नीति का संकेत माना जा रहा है।

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BRICS सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संबंधों में जारी खींचतान जैसी चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वैश्विक मतभेदों के बावजूद संवाद के रास्ते खुले रहने चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और महत्वपूर्ण खनिज समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में काम जारी रखने पर जोर दिया।

वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा भी अहम मानी जा रही है। वर्ष 2020 के सीमा विवाद के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात और बातचीत को द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की मौजूदगी भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारत के ईरान के साथ ऊर्जा, व्यापार और चाबहार बंदरगाह से जुड़े महत्वपूर्ण हित हैं। चाबहार भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का अहम मार्ग उपलब्ध कराता है।

BRICS में भारत का रुख चीन और रूस से कुछ अलग है। नई दिल्ली रूस और ईरान के साथ अपने पारंपरिक और रणनीतिक संबंधों को बनाए रखते हुए अमेरिका और यूरोप के साथ भी सहयोग बढ़ा रहा है। यही संतुलन भारत की विदेश नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है।

BRICS की सदस्यता को लेकर पाकिस्तान भी प्रयासरत है। उसने वर्ष 2023 में समूह में शामिल होने के लिए आवेदन किया था। हालांकि नए सदस्य को शामिल करने के लिए BRICS देशों की आम सहमति जरूरी है। ऐसे में पाकिस्तान की सदस्यता का फैसला केवल किसी एक देश के रुख पर निर्भर नहीं करता।

भारत की अध्यक्षता में हो रहा BRICS सम्मेलन व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक, सप्लाई चेन और सतत विकास जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के साथ ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका को मजबूत करने का अवसर भी है। सम्मेलन के जरिए भारत यह संदेश दे रहा है कि वह किसी एक शक्ति समूह तक सीमित रहने के बजाय सभी प्रमुख वैश्विक शक्ति केंद्रों के साथ संवाद और सहयोग को प्राथमिकता देता है।

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