
नई दिल्ली। BRICS शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित बिजनेस फोरम के उद्घाटन समारोह में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संगठन के 20 साल के सफर और बदलती वैश्विक व्यवस्था में उसकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में BRICS ने सदस्यता, एजेंडा और सहयोग के तरीकों के मामले में काफी विकास किया है। भारत की अध्यक्षता ने इस विकास को आगे बढ़ाने के लिए लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता दी है।
जयशंकर ने कहा कि BRICS संस्थागत सहयोग के 20 साल पूरे कर रहा है और यह वर्ष संगठन के लिए एक मील का पत्थर है। उन्होंने बिजनेस फोरम के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पर खुशी जताते हुए कहा कि शिखर सम्मेलन से पहले इस तरह का मंच आर्थिक सहयोग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
विदेश मंत्री ने कहा कि आज दुनिया ऐसे दौर से गुजर रही है जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं। ऐसे समय में BRICS देशों के बीच सहयोग की जरूरत और बढ़ जाती है। उन्होंने संगठन की प्राथमिकताओं को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।
BRICS के विस्तार का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि संगठन ने पिछले वर्षों में सदस्यता के साथ-साथ अपने एजेंडे और सहयोग के तरीकों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। भारत की अध्यक्षता का प्रयास इस विकास को लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के आधार पर आगे बढ़ाने का है।
बिजनेस फोरम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी आर्थिक कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मौजूदगी ऐसे समय में आर्थिक कूटनीति के महत्व को दर्शाती है, जब दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
भारत के लिए BRICS का यह सम्मेलन आर्थिक और कूटनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और बदलती आपूर्ति श्रृंखलाओं के बीच भारत BRICS देशों के साथ आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना चाहता है।
बिजनेस फोरम में व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ सदस्य देशों के बीच कारोबारी संपर्क आसान बनाने पर भी जोर दिया गया। BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने की कोशिश भी इसी व्यापक आर्थिक एजेंडे का हिस्सा है।
रूस की भारत में बिजनेस एंबेसडर ओल्गा कुलिकोवा ने BRICS करेंसी की संभावनाओं को लेकर उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि साझा मुद्रा से व्यापार आसान हो सकता है और इससे सदस्य देशों के बीच यात्रा भी बढ़ सकती है। उनके मुताबिक, यह सदस्य देशों के लिए बड़े अवसरों में से एक हो सकता है।
BRICS के आर्थिक एजेंडे में व्यापार, निवेश और वित्तीय सहयोग के साथ नई तकनीक और आपसी कनेक्टिविटी भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। भारत की कोशिश है कि संगठन के मंच का इस्तेमाल विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए किया जाए।
जयशंकर के बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत BRICS को बदलती वैश्विक व्यवस्था में एक प्रभावी और व्यावहारिक सहयोग मंच के रूप में देख रहा है। 20 साल पूरे होने के मौके पर भारत की अध्यक्षता में संगठन के एजेंडे में आर्थिक सहयोग, स्थिरता और नवाचार पर जोर दिया जा रहा है।
BRICS सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में बिजनेस फोरम से शुरू हुई आर्थिक चर्चाओं के शिखर सम्मेलन तक पहुंचने की उम्मीद है। आने वाले फैसले वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।




