
नई दिल्ली। BRICS समिट 2026 का आगाज बिजनेस फोरम के साथ हो गया है। शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित बिजनेस फोरम में सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों के बीच BRICS देशों के बीच कारोबारी संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत दुनिया के कई प्रमुख नेता हिस्सा लेने वाले हैं।
BRICS के आर्थिक एजेंडे को लेकर रूस की भारत में बिजनेस एंबेसडर और ‘ऑल रशियन पब्लिक ऑर्गनाइजेशन बिजनेस रशिया’ की जनरल काउंसिल की सदस्य ओल्गा कुलिकोवा ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने BRICS करेंसी की संभावनाओं को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि इससे देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने में मदद मिलेगी। उनके मुताबिक, साझा मुद्रा की व्यवस्था होने से सिर्फ कारोबार ही नहीं, बल्कि सदस्य देशों के बीच यात्रा भी बढ़ सकती है।
कुलिकोवा ने कहा कि रूस BRICS करेंसी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। उनका मानना है कि ऐसी व्यवस्था दोनों देशों और BRICS के अन्य सदस्य देशों के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे व्यापारिक संबंधों को मजबूती मिलेगी और आने वाले समय में सभी सदस्य देशों को इसका फायदा होगा।
BRICS में आर्थिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश ऐसे समय हो रही है, जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था तेजी से बदल रही है। कई देश अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अपनी स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में BRICS के भीतर भुगतान व्यवस्था को आसान बनाना और व्यापारिक लेनदेन की लागत कम करना महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
BRICS करेंसी का विचार लंबे समय से चर्चा में है। हालांकि, साझा मुद्रा की स्थापना एक जटिल प्रक्रिया है और इसके लिए सदस्य देशों के बीच व्यापक आर्थिक और वित्तीय सहमति की जरूरत होगी। फिलहाल BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान के विकल्पों को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
बिजनेस फोरम में आर्थिक सहयोग के साथ निवेश के नए अवसरों पर भी चर्चा हुई। सदस्य देशों के कारोबारी प्रतिनिधियों के बीच व्यापार बढ़ाने, निवेश को आसान बनाने और आपसी आर्थिक संपर्क मजबूत करने को लेकर विचार-विमर्श हुआ।
भारत के लिए BRICS का आर्थिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। देश एक ओर अपने निर्यात और निवेश के नए बाजार तलाश रहा है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक व्यापार में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। BRICS मंच भारत को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने का अवसर देता है।
रूस के साथ भारत के संबंधों में भी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का मुद्दा अहम है। दोनों देश रुपये और रूबल में कारोबार बढ़ाने के विकल्प तलाश रहे हैं। BRICS के स्तर पर भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश इस प्रक्रिया को और गति दे सकती है।
BRICS बिजनेस फोरम में कारोबारियों और नीति निर्माताओं के बीच हुई चर्चा से साफ है कि संगठन अब सिर्फ राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं रहना चाहता। आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश और वित्तीय व्यवस्था में बदलाव BRICS के भविष्य के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।
ओल्गा कुलिकोवा के बयान से भी संकेत मिलता है कि कारोबारी जगत BRICS के भीतर अधिक सुगम भुगतान व्यवस्था और आर्थिक एकीकरण को बड़े अवसर के रूप में देख रहा है। आने वाले समय में यदि सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार और भुगतान के तंत्र को मजबूत किया जाता है तो इसका असर व्यापार से लेकर पर्यटन और निवेश तक कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है।




