Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

सत्य निकेतन हादसे पर हाईकोर्ट सख्त… सरकार और MCD से सीधे सवाल

सत्य निकेतन हादसे पर हाईकोर्ट सख्त
सत्य निकेतन हादसे पर हाईकोर्ट सख्त
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Rishabh Rai

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत ढहने के मामले में सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। हादसे को लेकर अदालत ने दिल्ली सरकार और MCD को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि ऐसी घटनाओं को सिर्फ एक हादसा मानकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। अदालत ने सवाल उठाया कि जब सरकार गेस्ट हाउस को रेगुलेट कर सकती है, तो PG को रेगुलेट करने के लिए नियम क्यों नहीं बनाए जा सकते?

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि आखिर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि त्रासदी हो चुकी है, लेकिन अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटना दोबारा न हो। अदालत ने PG के आकार, बिजली व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को रेगुलेट करने की जरूरत पर जोर दिया।

Advertisement Box

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अगर PG के लिए पर्याप्त नियम नहीं हैं तो सरकार को नियम बनाने होंगे। अदालत ने कहा कि हर दूसरे साल ऐसी घटनाएं हो रही हैं और इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

DU और MCD की भी जिम्मेदारी तय

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हादसे की जिम्मेदारी सिर्फ बिल्डिंग मालिक तक सीमित नहीं रखी। अदालत ने कहा कि इस घटना के पीछे दिल्ली यूनिवर्सिटी और MCD की भी बराबर जिम्मेदारी है। कोर्ट ने DU से पूछा कि बाहर से आने वाले छात्रों के लिए विश्वविद्यालय और सरकार की ओर से कितने हॉस्टल उपलब्ध कराए गए हैं।

अदालत ने कहा कि DU बाहर से आने वाले छात्रों को पर्याप्त हॉस्टल सुविधा नहीं दे पाता, जिसके कारण बड़ी संख्या में छात्र PG में रहने को मजबूर होते हैं। हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों से इस पूरे मामले पर अधिक गंभीर और अर्थपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई।

दरअसल, सत्य निकेतन में ढही इमारतों में आसपास स्थित दिल्ली यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रहते थे। ऐसे में हादसे ने दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित आवास और हॉस्टल की उपलब्धता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिल्ली के सभी PG और हॉस्टल का सेफ्टी ऑडिट

हाईकोर्ट ने MCD को बड़ा निर्देश देते हुए दिल्ली के सभी PG और हॉस्टल का एक सप्ताह के भीतर सेफ्टी ऑडिट करने को कहा है। अदालत ने पूछा कि हादसे वाली इमारत के पास सभी जरूरी मंजूरियां थीं या नहीं। साथ ही MCD को दिल्ली के सभी PG और हॉस्टल की इमारतों की रिपोर्ट देने को कहा गया है।

रिपोर्ट में यह बताना होगा कि इमारतें कानूनी तरीके से बनी हैं या नहीं, उनमें कितने छात्र रह रहे हैं और सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। संबंधित विभागों को भी 10 दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

अवैध निर्माण पर भी कोर्ट नाराज

अदालत ने PG मालिकों द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण पर भी कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि कई जगह जिस इमारत को दो मंजिल बनाने की अनुमति मिलती है, उसे बढ़ाकर छह मंजिल तक बना दिया जाता है, जबकि नींव वही रहती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को अगर अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का पता होता तो ऐसे हादसों को टाला जा सकता था। अदालत ने चिंता जताई कि बड़ी संख्या में छात्रों की जान दांव पर लगी है और बचाव अभियान को पूरी ताकत से चलाने की जरूरत है।

MCD और दिल्ली पुलिस ने अदालत को भरोसा दिया कि राहत और बचाव अभियान में हर संभव कदम उठाया जा रहा है। अब मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं, बल्कि दिल्ली में हजारों छात्रों की सुरक्षा और उन्हें मिल रही आवासीय सुविधाओं का है।

आज का राशिफल

वोट करें

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दुनिया के सामने रोज बेनकाब हो रहे पाकिस्तान को दी गई एक अरब डॉलर की मदद पर क्या अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को फिर से विचार करना चाहिए?

और भी पढ़ें

WhatsApp